*** हिंदी प्रचार-प्रसार एवं सभी रचनाकर्मियों को समर्पित 'सृजन महोत्सव' चिट्ठे पर आप सभी हिंदी प्रेमियों का हार्दिक-हार्दिक स्वागत !!! संपादक:राजकुमार जैन'राजन'- 9828219919 और मच्छिंद्र भिसे- 9730491952 ***
Showing posts sorted by date for query डॉ. अरविंद श्रीवास्तव 'असीम'. Sort by relevance Show all posts
Showing posts sorted by date for query डॉ. अरविंद श्रीवास्तव 'असीम'. Sort by relevance Show all posts

Sunday, 31 January 2021

*दुख दर्द की आवाज* (कविता) - डॉ. अरविंद श्रीवास्तव 'असीम'

 

 *दुख दर्द की आवाज*

(कविता)

गांव की कच्ची गली से

 जब निकलता हूँ 

 हर समय दुख दर्द की 

आवाज सुनता हूं ।

            यह शिकायत खेत की

             फिर मेघ ने धोखा दिया

               उग सके कुछ खेत में 

               यह हौसला कम कर दिया 

                 मेढ से नजरें चुराकर

                   मैं खिसकता हूं 

               गांव की कच्ची गली से •••

चरमराती चारपाई 

रात भर रोती रही 

और टूटी जूतियां

 कोने में  चुप सोती रही

 देख कर भूखा बुढ़ापा 

मैं तड़पता हूं ।

गांव की कच्ची गली से      •••••

                हो गई है सांझ

                 बापू लौट कर कब आएंगे 

                  दर्द की पीड़ा बहुत है 

                   कब दवाई लाएंगे 

                   इन दुखद अनुभूतियों से 

                   मै नित गुजरता हूं 

             गांव की कच्ची गली से •••••

-०-

पता 
डॉ. अरविंद श्रीवास्तव 'असीम' 
दतिया (मध्य प्रदेश)


-०-

डॉ. अरविंद श्रीवास्तव 'असीम'  जी का लेखन इस ब्लॉग पर पढ़ने के लिए शीर्षक चित्र पर क्लिक करें.

***
मुख्यपृष्ठ पर जाने के लिए चित्र पर क्लिक करें 

Friday, 15 January 2021

*मेरा गांव* (कविता) - डॉ. अरविंद श्रीवास्तव 'असीम'


*मेरा गांव* 

(कविता)

                सड़क किनारे गांव मेरा है

                  उसकी याद सताती है ।

भीड़ -भाड़ है सदा वहां 

एक लगता सुंदर मेला है ।

छोटी- मोटी कई दुकानें 

और पान का ठेला है।

 कटती फसल अन्न घर आता

 हर घर खुशियां आती है ।

सड़क किनारे गांव ••••••

उसकी याद•••••••।

          अपनापन है सदा वहां 

           सब मेल -जोल से रहते हैं।

           बड़ों का करते मान सभी

          दुःख-दर्द साथ में  सहते हैं ।

          काकी- दादी शुभ पर्वों पर

           मधुर स्वरों में गाती है।

          सड़क किनारे गांव •••••

          उसकी याद•••••।

 

गांव को किसकी नजर लगी है 

राजनीति की हवा चली ।

नेता गीरी, नारे  बाजी 

गूंज उठी हर गली गली।

 जिन गलियों में खेला -कूदा 

वे मुंह मुझे  चिढाती है 

सडक  किनारे गांव •••••

उसकी याद ••••••••।

-०-

पता 
डॉ. अरविंद श्रीवास्तव 'असीम' 
दतिया (मध्य प्रदेश)


-०-

डॉ. अरविंद श्रीवास्तव 'असीम'  जी का लेखन इस ब्लॉग पर पढ़ने के लिए शीर्षक चित्र पर क्लिक करें.

***
मुख्यपृष्ठ पर जाने के लिए चित्र पर क्लिक करें 

सृजन रचानाएँ

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ