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Saturday, 31 October 2020

इस बार दीवाली पर (लघुकथा) - टीना रावल

 

 इस बार दीवाली पर
(लघुकथा)
"अंजली! आ गई तू,  कैसी है ? और घर में सब ठीक तो है " मेधा ने पॉर्च के बेंच पर आकर बैठी अंजलि से पूछा। 
"हां आंटी जी...... सब ठीक है। पर अब केवल छह घर ही हैं काम के,  तो तंगी रहती ही है।"  अंजलि ने उदासी से कहा। 
अंजलि मेधा के घर डेढ़ साल से काम कर रही थी,  जरूरत पड़ने पर उसके चार साल के बेटे को कभी संभाल भी लेती थी। पर लॉक डाउन होने के बाद मेधा को उसे काम पर नहीं आने को कहना पड़ा। 
"अंजलि,  मैं सुरक्षा कारणों से तुम्हें अभी काम पर नहीं बुला सकती,  मैं स्वयं कर रही हूं । बस,  दीवाली पर तुम तीनों भाई बहन के लिए नए कपड़े और मिठाई के लिए पैसे देने ही बुलाया था।
"लेकिन आंटी जी, आपने लॉकडाउन में भी दो महीने की तनख्वाह बिना काम की दी थी । अब यह और....  अच्छा नहीं लग रहा। बहुत सारे लोगों ने तो सफाई में निकले पुराने कपड़े और बेकार सामान दिए हैं जिसे हमारे एक कमरे के घर में रखने की जगह भी नहीं है।" अंजलि ने दुख से कहा।
"कोई बात नहीं बेटा,  मुश्किल वक्त है सावधानी से निकल ही जाएगा,  यह लो पकड़ो।  मेधा ने प्यार से बेग पकड़ा दिया। 
इस बार सबके लिए सोचना है किसी के भी घर सूनी या फीकी  दिवाली न मने।
-०-
पता:
टीना रावल
जयपुर (राजस्थान)

 

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Thursday, 1 October 2020

वह है कौन (कविता) - टीना रावल


वह है कौन
(कविता)
वो पंछियों के साथ जागकर 
ज़िद्दी मवेशियों को खींचती है,
चिलचिलाती धूप में अपनी 
सुनहरी उम्मीदें बोती है,
हाड़ जमाती रातों में 
खेतों में रखवाली करती 
जागती आँखों में 
अपने सपने सींचती है। 
वह कड़कते मौसम में 
अपनी रोटी काटती है 
और पुरज़ोर बचाती है 
उसे बेरहम मौसम की मार से । 
एक-डेढ़ मन के गट्ठर को 
सिर रखवाने की बाट जोहती है।

एक बेटे की आस में 
तीन-चार बेटियों के बाद भी  
एक-दो को दुनिया में 
आने से रोकती है। 
प्रसव पीड़ा को भाग्य मानकर 
निश्छल मुस्कुरान बिखेरती है।

ऐसा क्या है...
जो वो नहीं करती है ?


वो अपने घर का राजा है,
सो...बस आराम ही करता है। 
गाँव के हर घर की 
बहू-बेटियों को घूँघट 
में भी खूब पहचानता है। 
उनके कहाँ-कब आने-जाने का 
पूरा हिसाब जानता है। 

वह गाँव के चौपाल की
पान की दुकान की शान है,
और ताश के पत्तों की जान है। 
क्यों न हो पुरख़ों की ज़मीनों का
आख़िर झूठा अभिमान है।

ऐसा क्या है.... 
जो वो करता है ?

तैयार फसलों को बस 
बाहर बेच आता है 
नफ़ा हो तो भी 
नुकसान बताता है।
पुरुष जो ठहरा....
'मालिक' तो वो ही कहलाता है।
-०-
पता:
टीना रावल
जयपुर (राजस्थान)

 

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