*** हिंदी प्रचार-प्रसार एवं सभी रचनाकर्मियों को समर्पित 'सृजन महोत्सव' चिट्ठे पर आप सभी हिंदी प्रेमियों का हार्दिक-हार्दिक स्वागत !!! संपादक:राजकुमार जैन'राजन'- 9828219919 और मच्छिंद्र भिसे- 9730491952 ***
Showing posts sorted by relevance for query मधुकर वनमाली. Sort by date Show all posts
Showing posts sorted by relevance for query मधुकर वनमाली. Sort by date Show all posts

Thursday, 29 October 2020

"मन का दीया" (कविता) - मधुकर वनमाली


"मन का दीया"
(कविता)
मन का दीया जलाए बैठा
मीत मेरे जल बुझने आना।

तेरे उर में तिमिर बसे जो
खाली मन का शिविर लगे जो
कांच के टुकड़ों सा बिखरा मन
पथ में तेरे जाके बिछे जो
नही जरा तुम राह को रोना
बस मेरी लौ तक आ जाना
मन का दीया जलाए बैठा
मीत मेरे जल बुझने आना।

जीवन में कैसी तृष्णा है
प्यास बढ़े पीने से देखो
हो न कभी जो पग ये डगमग
मजा नहीं जीने में देखो
स्वाति बूंद सा नीर नयन का
मैंने वह मोती पहचाना
मन का दीया जलाए बैठा
मीत मेरे जल बुझने आना।

मिलन की बेला में अलसाई
सोयी है या जाग रही तू
सुंदर वह सपनों की वीणा
मालकोश के राग चढ़ी तू
आज नया सा गीत तुम्हें दूं
सुन कर हौले से मुस्काना
मन का दीया जलाए बैठा
मीत मेरे जल बुझने आना।
-०-
पता:
मधुकर वनमाली
मुजफ्फरपुर (बिहार)

-०-
मधुकर वनमाली की रचना पढ़ने के लिए शीर्षक चित्र पर क्लिक करें! 

***
मुख्यपृष्ठ पर जाने के लिए चित्र पर क्लिक करें 

सृजन रचानाएँ

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ