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Saturday, 1 February 2020

शायरी (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


शायरी
(कविता)
मैं शायरी हूँ
जिसे शायर ने बनाया है
मैं शायरी हूँ
मुझे गवैया ने साँस दिया है

ओस के द्वारा फूल की पंखुड़ी
सुन्दर होता है
चाँदनी ढलते ही हर आँगन
हसीने की तरह ही हैं
तारे चमकते ही आसमान में
स्वर्ग को याद आता है
सारी सुन्दरता जुड़ कर के
मुझे बनाया है

रिश्ते बना देती हूँ मैं
गाने की तरह भी आती हूँ मैं
विस्मित करती हूँ लोगों को मैं
एक परी की तरह हूँ मैं ।।।

-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

***
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2 comments:

  1. सुन्दर रचना के लिये रचनाकार को बहुत बहुत बधाई है।

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