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Thursday, 7 January 2021

नववर्ष फिर से आ गया (कविता) - अनामिका


नववर्ष फिर से आ गया

(कविता)
आज लो एक बार फिर मौसम का जादू छा गया
नित नवल खुशियां लिये नववर्ष फिर से आ गया

किस तरह होगा उदय  सूरज  निशा  की गोद  से
ओढ़नी   में  भोर  की  छिपने  लगा  शरमा  गया

हर  दिशा  में  कोहरे  की  एक चादर   छा  रही
शीत  की  ठंडी  लहर  अब पर्वतों  से  आ रही

उपवनों   के   फूल  सारे   ताजगी  से   भर   गये
खिलखिलाकर हँस  पड़े  मन को मयूरा  कर गये

नव  दिवस  में  उर सभी  के  नव  उमंगें भर  रहीं 
खेलती  मुस्कान  अधरों   पर  शरारत  कर   रहीं 

घाव  सब  पिछले  बरस के  धीरे  से सहला गया 
कुछ पलों  का साथ  सबका मन मेरा बहला गया

कोहरे  की  ओढ़  चादर  चाँद  भी  छिप  सा गया
लग रहा  जैसे  ख़ुशी  का  कारवाँ  दिख  सा  गया।।
-०-
पता: 
अनामिका
खुर्जा (उत्तरप्रदेश) 

-०-

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Wednesday, 4 December 2019

राम पर कविता के बहाने (आलेख) - अमित खरे

राम पर कविता के बहाने
(आलेख)
आप मेरी बात को सबसे पहले पढ़ें , समझें ,
और फिर इस बात का परीक्षण करें कि मै सही हूँ या गलत । अगर सहमत हों तो इस को कहीं आगे बढ़ाएं ।
अन्यथा मै पहले भी खुश था अभी भी खुश हूँ ।
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमे अनामिका अम्बर प्रभु श्री राम पर एक कविता का वाचन कर रहीं हैं ।
प्रभु श्री राम ने जाने कितने कण्ठों को अपनी स्तुति गान करने के लिए चुना है । फिर चाहे महाऋषि बाल्मीकि हों , तुलसी दास जी हों, निराला जी हों , मैथली शरण गुप्त हों जाने कितने कितनों ने राम की महिमा गान करके खुद की श्री वृद्धिकी है । जिन जिन को प्रभु श्रीराम ने चुना है वे भाग्यवान हैं । उन्हें बधाई ।
राष्ट्रकवि मैथली शरण गुप्त जी कहते हैं
"राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है
कोई कवि हो जाए सहज सम्भाव्य है "।
राष्ट्र कवि मैथली शरण गुप्त जी के अनुसार
राम सबके हैं । हर कलम साधक को राम पर अधिकार है ।
एक तर्क यह भी है कि "प्रभु श्री राम पर कुछ भी लिखा जाए वह तुलसी दास जी का पुनर्वाचन ही होगा "। यह तर्क कहीं न कहीं राम पर लिखे में साम्य और रचनाकार पर लगने वाले चोरी के आरोप के बचाव में एक दलील मात्र है ।सबका अपना तेवर होता है जो रचनाकारों को एक दूसरे से पृथक करता है ।
लेकिन इस बात पर भी विमर्श होना चाहिए कि किसने क्या लिखा कैसा लिखा क्यों लिखा ।
मै कुछ कहना चाहता हूँ ।
पिछले दिनों जो वीडियो वायरल हुआ उससे मुख्य रूप से तीन किरदारों की चर्चा आई जिसमे डॉ हरीओम पँवार मेरठ , श्री कमलेश शर्मा इटावा , एवं अनामिका अम्बर मेरठ ।
मै तीनों के विषय में बात रखने की कोशिश करूँगा ।
सबसे पहले डॉ हरीओम पँवार की कविता की बात डॉ पँवार की कविता एक लंबी कविता है । जिसे वो चीख चीख कर पढ़ते हैं ।
इसमे उन्होंने रामकथा से जुड़े प्रसंग लिए हैं , राम कथा से जुड़ीं घटनाएं लीं है । किरदार वही रहेंगे । घटनाएं वही रहेंगी । सबका कहने का अपना तरीका होता है । सबका अपना शिल्प होता है जो रचना में झलकता है ।
अब कमलेश शर्मा जी के गीत पर बात करते हैं । "राम हुए हैं कितने और प्रमाण दें " गीत मै ने कई बार समक्ष में सुना है । वो इसे गाकर पढ़ते हैं । चीखने में और गाने में फर्क होता है और यह गीत विशुद्ध कविता है ।
ह्रदय पटल पर अपने आप अंकित होने वाला गीत है ।
राम कथा के संदर्भ , पात्र , घटनाएं इसमें सबसे बेहतर तरीके से उल्लेखित की गईं हैं ।
ताजा मामले में कमलेश जी का गीत सर्वश्रेष्ठ है । यह मेरी निजी राय है । मुझे यह कहने में कोई संकोच नही है ।
अब अनामिका अम्बर - कविता के अवमूल्यन के सन्दर्भों में चर्चित वायरल वीडियो में राम प्रभु पर कविता हो रही है यह तो पता चल रहा है । किसकी कविता हो रही है पता नही चल रहा है ।
कहीं कहीं यह लगता है कि डॉ हरीओम पँवार के शब्दों को पर्यायवाची के रूप में रख दिया हो ।
कहीं कमलेश जी के गीत की मिट्टी उठा ली हो ।
चलो उठा भी लो तो आपका कोई साँचा भी नही है जिसमे आप पँवार जी या कमलेश जी की मिट्टी उठा कर सही आकृति दे पाएं । मै इसे कविता नही मानता हूँ। मुझे कोई संकोच नही है ।
मेरे विचार से तीनों रचनाओं को एक कागज पर लिखकर विश्लेषण होना चाहिए । पत्र पत्रिकाएं इस विषय पर छापकर चर्चा खड़ी करें । तो और सही होगा ।
और अंत में मै श्रोताओं से , पाठकों से , समीक्षकों से , आलोचकों से यह पश्न करता हूँ कि वे तय करें कि ये उचित है , अनुचित है , चोरी है , महाजनी है क्या है ।
तय हो ।
दिनकर जी की अदालत से
समर शेष है नही पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके भी अपराध ।
जय जय
-०-
अमित खरे 
दतिया (मध्य प्रदेश)
-०-




***
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Friday, 22 January 2021

कोख की तड़प (कविता) - अनामिका

कोख की तड़प
(कविता)
कुछ छोटे -छोटे पौधे जो
आंगन में उसने रोपें थे
जाने कब वो बन गये पेड़
हिलकर समीर के झोंके से,

उसकी ममता की छाया में
निज तन निहार इठलाते है
अब उसको छाया देते है
उस पर फल फूल लुटाते है,

सूरज क़ी भीषण गर्मी से
ज़ब भी मुरझा से जाते थे
उसका पाकर कोमल स्पर्श
नव जीवन से भर जाते थे,

नवजात शिशु की भांति ही वो
उन पर निज स्नेह लुटाती थी
निज रिक्त कोख की पीड़ा को
वो भूल उसी पल जाती थी,

जैसा रिश्ता माँ बच्चों का
वैसा था उसका पौधों से
पल -पल टूटी थी समाज में
सूनी कोख के विरोधों से।।
-०-

पता: 
अनामिका
खुर्जा (उत्तरप्रदेश) 

-०-

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Saturday, 28 December 2019

राम पर कविता के बहाने (आलेख) - अमित खरे

राम पर कविता के बहाने
(आलेख)
आप मेरी बात को सबसे पहले पढ़ें , समझें ,
और फिर इस बात का परीक्षण करें कि मै सही हूँ या गलत । अगर सहमत हों तो इस को कहीं आगे बढ़ाएं ।
अन्यथा मै पहले भी खुश था अभी भी खुश हूँ ।
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमे अनामिका अम्बर प्रभु श्री राम पर एक कविता का वाचन कर रहीं हैं ।
प्रभु श्री राम ने जाने कितने कण्ठों को अपनी स्तुति गान करने के लिए चुना है । फिर चाहे महाऋषि बाल्मीकि हों , तुलसी दास जी हों, निराला जी हों , मैथली शरण गुप्त हों जाने कितने कितनों ने राम की महिमा गान करके खुद की श्री वृद्धिकी है । जिन जिन को प्रभु श्रीराम ने चुना है वे भाग्यवान हैं । उन्हें बधाई ।
राष्ट्रकवि मैथली शरण गुप्त जी कहते हैं
"राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है
कोई कवि हो जाए सहज सम्भाव्य है "।
राष्ट्र कवि मैथली शरण गुप्त जी के अनुसार
राम सबके हैं । हर कलम साधक को राम पर अधिकार है ।
एक तर्क यह भी है कि "प्रभु श्री राम पर कुछ भी लिखा जाए वह तुलसी दास जी का पुनर्वाचन ही होगा "। यह तर्क कहीं न कहीं राम पर लिखे में साम्य और रचनाकार पर लगने वाले चोरी के आरोप के बचाव में एक दलील मात्र है ।सबका अपना तेवर होता है जो रचनाकारों को एक दूसरे से पृथक करता है ।
लेकिन इस बात पर भी विमर्श होना चाहिए कि किसने क्या लिखा कैसा लिखा क्यों लिखा ।
मै कुछ कहना चाहता हूँ ।
पिछले दिनों जो वीडियो वायरल हुआ उससे मुख्य रूप से तीन किरदारों की चर्चा आई जिसमे डॉ हरीओम पँवार मेरठ , श्री कमलेश शर्मा इटावा , एवं अनामिका अम्बर मेरठ ।
मै तीनों के विषय में बात रखने की कोशिश करूँगा ।
सबसे पहले डॉ हरीओम पँवार की कविता की बात डॉ पँवार की कविता एक लंबी कविता है । जिसे वो चीख चीख कर पढ़ते हैं ।
इसमे उन्होंने रामकथा से जुड़े प्रसंग लिए हैं , राम कथा से जुड़ीं घटनाएं लीं है । किरदार वही रहेंगे । घटनाएं वही रहेंगी । सबका कहने का अपना तरीका होता है । सबका अपना शिल्प होता है जो रचना में झलकता है ।
अब कमलेश शर्मा जी के गीत पर बात करते हैं । "राम हुए हैं कितने और प्रमाण दें " गीत मै ने कई बार समक्ष में सुना है । वो इसे गाकर पढ़ते हैं । चीखने में और गाने में फर्क होता है और यह गीत विशुद्ध कविता है ।
ह्रदय पटल पर अपने आप अंकित होने वाला गीत है ।
राम कथा के संदर्भ , पात्र , घटनाएं इसमें सबसे बेहतर तरीके से उल्लेखित की गईं हैं ।
ताजा मामले में कमलेश जी का गीत सर्वश्रेष्ठ है । यह मेरी निजी राय है । मुझे यह कहने में कोई संकोच नही है ।
अब अनामिका अम्बर - कविता के अवमूल्यन के सन्दर्भों में चर्चित वायरल वीडियो में राम प्रभु पर कविता हो रही है यह तो पता चल रहा है । किसकी कविता हो रही है पता नही चल रहा है ।
कहीं कहीं यह लगता है कि डॉ हरीओम पँवार के शब्दों को पर्यायवाची के रूप में रख दिया हो ।
कहीं कमलेश जी के गीत की मिट्टी उठा ली हो ।
चलो उठा भी लो तो आपका कोई साँचा भी नही है जिसमे आप पँवार जी या कमलेश जी की मिट्टी उठा कर सही आकृति दे पाएं । मै इसे कविता नही मानता हूँ। मुझे कोई संकोच नही है ।
मेरे विचार से तीनों रचनाओं को एक कागज पर लिखकर विश्लेषण होना चाहिए । पत्र पत्रिकाएं इस विषय पर छापकर चर्चा खड़ी करें । तो और सही होगा ।
और अंत में मै श्रोताओं से , पाठकों से , समीक्षकों से , आलोचकों से यह पश्न करता हूँ कि वे तय करें कि ये उचित है , अनुचित है , चोरी है , महाजनी है क्या है ।
तय हो ।
दिनकर जी की अदालत से
समर शेष है नही पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके भी अपराध ।
जय जय
-०-
अमित खरे 
दतिया (मध्य प्रदेश)
-०-




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Saturday, 4 April 2020

समझदारी में सूझ (कहानी) - अनामिका रोहिल्ला

समझदारी में सूझ
(कहानी)
पन्हेरा कलां नाम का एक गांव है।वहां पर सब लोग सुख शांति से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। हर परेशानी का सामना एकजुट होकर करते हैं। वहां के सभी लोग मेहनत और कठोर परिश्रम को अपनी सफलता का राज बताते हैं। कुछ समय पहले की बात है वहां पर कोरोना वायरस महामारी ने दस्तक दी।
भोली: "अच्छु अच्छु" अरे सुनते हो। बुखार ,सरदर्द, जुखाम ने मुझे हिला कर रख दिया है। शरीर में कमजोरी आ गई। क्या करूं?? अरे सुनते हो क्या?
घीसू: तुम इतनी चिंता क्यों करती हो। दवा खा लो कुछ दिनों में ठीक हो जाओगी।
जैसे भोली बीमार हुई वैसे ही और लोग जो इसके संपर्क में थे वह भी बीमार हो गए ।यह बीमारी वाली बात गांव के सरपंच के पास पहुंची। सरपंच ने अपने एक कार्यकर्ता को फोन कियाऔर पूछना - चाहा कि यह हो क्या रहा है?सरपंच को लगा कि शहर के लोगों में ज्यादा समझ है इसलिए अपने शहर के कार्यकर्ता को भी फोन किया।

सरपंच (फोन लगाते है): हेलो!! कैसे हो?
कार्यकर्ता मोहन: हेलो सर!! मैं ठीक हूं। गांव का क्या हाल-चाल?
सरपंच: क्या बताऊं गांव में एक बीमारी आई है। वह तो महामारी की तरह फैल रही है। कुछ अता- पता नहीं। इसलिए तुम्हें फोन किया।
चर्चा समाप्त होने पर मोहन ने सरपंच को बताया कि यह कोरोना वायरस के लक्षण लग है।आप सब को यह सूचना दे, दीजिए कि वह अपने घर से बाहर ना निकले।
सरपंच ने बिल्कुल वैसा ही किया। लेकिन किसी भी गांव वाले को उन पर विश्वास ना था,और सरपंच की बात टाल दी। सरपंच ने मोहन को फोन लगाया और सब बताया। मोहन तुरंत गांव आ गया।गांव में प्रोजेक्टर का बंदोबस्त किया और कोरोना वायरस का एक अच्छा सा भाषण दिया। उसने हमारे प्रधानमंत्री जी का वीडियो भी दिखाया।मोहन की बात सुनकर गांव वाले यकीन करने लगे ,और सभी अपने घर में बंद हो गए । पूरा गांव एकदम सुनसान हो गया।
धीरे-धीरे कोरोना वायरस गांव से चला गया।सरपंच ने एक बार फिर मीटिंग बुलाई और बोले: हम सब ने अपनी जान बचाई तो गांव बचा । वैसे ही हमें मोहन जैसे लोगों का साथ देकर सबकी जान बचानी चाहिए। ताकि ताकि सब स्वस्थ रह सके।
सभी ने सरपंच का शुक्रिया अदा किया और तालियां बजाई सरपंच जी ने कहा "जान है तो जहान है"
-०-
पता:
अनामिका रोहिल्ला
दिल्ली 
-०-

***
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Tuesday, 23 March 2021

शहीदे आजम (कविता) - अनामिका रोहिल्ला

शहीदे आजम
(कविता)
27 सितंबर को एक युवक
इस धरती पर आया था
नाम भगत सिंह और साथ
कुछ कर गुजरने की मन में इच्छा लाया था
गांव खटकड़ कलां पंजाब से
एक साहसी युवक में आया था

अंग्रेजों से हमने खूब लड़ी लड़ाई थी
लड़ते-लड़ते भगत ने अपनी जान गवाई थी
मौत को हंसते-हंसते उसने गले लगाया था
वह एक युवक खटकड़ कला से आया था
मौत का उसको डरना था सीने में जोश जोशीला था

तुम छोड़ गए थे आजादी का सपना
जो आखिर हमने पूरा कर दिखाया था
साथ मिलकर हम ने अंग्रेजों को
पिछोर गिराया था

खूब लड़े थे आप हमारी पावन धरती के लिए
सलाम करते हैं हम आपको आपके उपकार के लिए
आपके जाने का दुख भी रहेगा
सुख होगा अपने देश के लिए
सलाम करते हैं हम आपको फिर से
जो आप एक नया जीवन दे गए हमें जीने के लिए
-०-
पता:
अनामिका रोहिल्ला
दिल्ली 
-०-

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Sunday, 19 April 2020

प्रकृति और नव वर्ष (कविता) - अनामिका रोहिल्ला

प्रकृति और नव वर्ष
(कविता)
प्रकृति का दोहन
ना करें,इंसान
वरना भुगतने
पड़ेंगे भयानक परिणाम

प्रकृति जब संतुलन
बनाती है,
तो कोरोना वायरस
रूपी कोहराम
मचाती है।

यह असंतुलन
इंसानों पर
पहले भी ,पड़ा था
जब प्रकृति ने
बुलबुल चक्रवात,
अमेजन की भीषण आग,
केदारनाथ में बादल फटना,
ग्रेटा थन बर्ग का यूएनओ में रुदन
संकेत दिए बारी-बारी
अब तो सुधर जा मनुज
अब है,
तेरी बारी

आओ इस
नव वर्ष पर
संकल्प करें,
कि प्रकृति के प्रति,
कृतज्ञता का भाव धरे
उसे सवार कर
उसका नित,
आभार प्रकट करें।
-०-
पता:
अनामिका रोहिल्ला
दिल्ली 
-०-

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सृजन रचानाएँ

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

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हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ