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Saturday, 7 November 2020

उड़ चला (कविता) - अमित डोगरा

उड़ चला
(कविता)
उड़ चला,
आज मैं उड़ चला
दूर चला बहुत दूर चला।
आजाद हो गया मैं
पिंजरे की कैद से,
आजाद हो गया
रोज की घुटन से,
अपनी मंजिल को
पाने के लिए आज
मैं चल पड़ा।
एक नए पथ पर
निकल पड़ा,
एक नई दुनिया में
चल पड़ा,
जहां सब कुछ नया होगा,
पुराने रास्तों को छोड़ चला,
अपने अस्तित्व को पहचाने
अब चला पड़ा
अपने आपको को पाने
आज निकल पड़ा,
अपनी कर्तव्यनिष्ठा को
निभाने चला पड़ा।
-०-
पता:
अमित डोगरा 
पी.एच डी -शोधकर्ता
अमृतसर

-०-

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Wednesday, 9 September 2020

अभी नहीं देखा (कविता) - अमित डोगरा

अभी नहीं देखा
(कविता)
सिर को झुकते देखा है,
पर झुकाते नहीं देखा
अभी अपनापन देखा है,
परायापन नहीं देखा
अभी प्यार देखा है,
नफरत नहीं देखी
अभी दोस्ती देखी है,
 दुश्मनी नहीं देखी
अभी इज्जत देते हुए देखा है,
बेइज्जती नहीं देखी
सब कुछ पाते हुए देखा है,
सब कुछ खोते हुए नहीं देखा
सबको साथ देते देखा है,
अकेलापन नहीं देखा
मेरी खामोशी देखी है,
मुझे ज्वालामुखी बनते नहीं देखा
 पानी जैसे शांत चलते देखा है,
 उसी पानी को सब कुछ
 बहाते ही नहीं देखा
अभी सिर्फ तूफान देखा है,
तूफान को बवंडर बनते नहीं देखा
सच्चाई पर पर्दे पड़े देखे हैं,
उन परदो को उठते नहीं देखा
-०-
पता:
अमित डोगरा 
पी.एच डी -शोधकर्ता
अमृतसर

-०-

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Wednesday, 7 October 2020

याद क्या है (कविता) - अमित डोगरा

याद क्या है
(कविता)
यादें क्या है,
यादें जो हमें किसी के होने का
एहसास करवाती है,
यादें जो हमें
किसी को भूलने नहीं देती,
यादें जो अक्सर
तन्हाई में आती है,
यादे उसकी आती है ,
जो प्रत्येक स्थिति में हमारे साथ रहता है,
यादें उसकी आती है,
जिसे हमारे दर्द का एहसास होता है,
यादें उसकी आती है ,
जो हमारी खामोशी को पढ़ लेता,
यादें उसकी आती है ,
जो हमारी प्रत्येक गलती को
माफ कर देता है,
यादें उसकी आती है,
जिसे अक्सर हम छोड़ आते हैं ,
यादें उसकी आती है,
जिसे हम कभी समझ ही नहीं पाते,
यादें उसकी आती है,
उस जैसा कोई ओर मिलता ही नहीं है,
यादे उसकी आती है,
जो पास होकर भी हमसे दूर चला जाता है।
-०-
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अमित डोगरा 
पी.एच डी -शोधकर्ता
अमृतसर

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Friday, 7 August 2020

वक्त (कविता) - अमित डोगरा


वक्त
(कविता)
वक्त बदलेगा,
सब कुछ बदल जाएगा,
आज तेरे साथ हूं,
फिर तेरे सामने हूंगा,
आज तेरी नजरों के सामने हूं ,
फिर सामने होते हुए भी दूर हूंगा,
आज तेरे साथ चल रहा हूं,
फिर एक नए पथ पर हूंगा ,
आज तेरी यादों में हूं,
फिर यादों से कोसों दूर हूंगा ,
आज तेरी हंसी की वजह हूं ,
फिर तेरी खामोशी का कारण हूंगा,
आज सिर्फ तेरा हूं,
फिर पता नहीं किसका हूंगा,
मैं तो वही हूं और वही रहूंगा,
बस वक्त बदल जाएगा,
साथ चलने वाला हमसफ़र
कोई और होगा
बस तुम नहीं होगे।
-०-
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अमित डोगरा 
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अमृतसर

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Tuesday, 22 September 2020

अग्रदूत (कविता) - अमित डोगरा

अग्रदूत
(कविता)
अनहद नाद  का दूत हूं मैं,
मेरा किसी से
कोई रिश्ता नाता नहीं ,
मैं केवल सत्य
और सच्चाई का दूत हूं,
जब-जब धर्म की हानि होती है ,
तब तब मैं पृथ्वी पर
अवतरित होता हूं ,
कभी मैं राम बनकर
रावण का वध करता हूं ,
तो कभी कृष्ण बनकर
कंस जैसे अत्याचारियों का दमन करता हूं,
कभी मैं मीरा बनकर
भक्ति रस में खो जाता हूं,
तो कभी मैं नानक बनकर
जगत में मानवता का संदेश देता हूं ,
तो कभी मैं गोविंद सिंह बनकर
शत्रुओं को खुदेड़ता हूं ,
तो कभी अल्लाह का बंदा बन कर
अल्लाई नूर बांटता हूं ,
फिर भी इस बुद्धिजीवी युग के लोग
मुझे मिथ कहते हैं,
मैं मिथ नही,
केवल मैं ही सत्य हूं ,
और मैं ही सत्य रहूंगा  
-०-
पता:
अमित डोगरा 
पी.एच डी -शोधकर्ता
अमृतसर

-०-

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Tuesday, 25 August 2020

जीवन का अंतिम सत्य (लघु आलेख) - अमित डोगरा

जीवन का अंतिम सत्य 
(लघु आलेख)
    कभी किसी ने बैठकर सोचा ,नहीं सोचा होगा, क्योंकि हम अपने जीवन में इतने व्यस्त हैं, कि हमारे पास इस मानव जीवन के अंतिम सत्य के बारे में सोचने का समय नहीं है, हमारे पास केवल अपनी तृष्णाओं की पूर्ति का समय है ,हमें केवल धन एकत्रित करना है, हमें केवल भोग भोगने हैं, हमें केवल अपनी सत्य स्थापित करनी है, हमें केवल दूसरों को नीचा दिखाना है, पर कभी किसी ने सोचा ,यह सब भोग क्षण भर के हैं ,हमारे से पहले इस पृथ्वी पर कितने राजा, महाराजा आए, जो कितने शक्तिशाली थे, उन्होंने अपनी भक्ति से देवो को प्रसन्न करके कई वरदान हासिल किए,पर  वो भी एक दिन काल के ग्रास बन गए, तो क्यों आज इस पृथ्वी का तुछ्च सा मानव यह भूल गया है, उसे भी एक दिन काल का ग्रास बनना है,अगर भूल गए हैं , तो एक दिन शमशान भूमि में जाकर किसी जलते मुर्दे को देख आए ,क्योंकि यही जीवन का अंतिम सत्य है।।
-०-
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Monday, 8 March 2021

लिंगवाद विरोध का प्रतीक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (आलेख) - अमित डोगरा


लिंगवाद विरोध का प्रतीक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

(आलेख)
8 मार्च को प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व भर में महिला दिवस मनाया जाता है। वास्तव में यह दिवस महिलाओं को उनके योगदान को मान्यता देने के लिए मनाया जाता है। जनसंख्या के आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं की आबादी पूरे विश्व में आधी हैं, फिर भी हमारे समाज में उनको उचित दर्जा और स्थान प्राप्त नहीं है । उन पर कई तरह के अत्याचार किए जाते हैं, इसी बात को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्रीय संघ ने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। इस दिन पूरे विश्व में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है। इसी कारण इस दिवस को लिंगवाद दिवस का प्रतीक भी माना गया है, जिससे महिलाओं को भी बिना लिंग वाद के पुरुषों के समान प्रत्येक क्षेत्र में बराबर अधिकार देने के लिए जागरूक किया जाता है। हमारे देश में भी महिलाओं की प्रगति और उत्थान के लिए भी नए-नए कार्यक्रम चलाए जाते हैं ,इसी उपलक्ष्य में, 1996 में भविष्य के लिए योजना ,1997 में महिला और शांति तालिका, 1998 में महिला और मानवाधिकार, 1999 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से मुक्त दिवस, 2000 में शांति के लिए एकजुट महिलाएं ,2001 में महिला और शांतिः महिला का संघर्ष प्रबंधन, 2002 में आज की अफगान महिलाः वास्तविकता और अवसर ,2003 में लिंग समानता और स्त्री विकास लक्ष्य, 2004 में महिला और एचआईवी , 2005 में लिंग समानता :अधिक सुरक्षित भविष्य का निर्माण, 2006 में निर्माण लेने में महिलाएं ,2007 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को समाप्त करना, 2008 में महिला और लड़कियों में निवेश, 2009 में महिला हिंसा को समाप्त करने के लिए महिला और पुरुष एकजुट, 2010 में समान अधिकार, 2011 में शिक्षा, परीक्षण एवं विज्ञान में समान पहुंच, 2012 में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना, 2013 में वचन देना एक वचन है, 2014 में महिलाओं के लिए समानता, 2015 में महिला सशक्तिकरण, 2016 में लैंगिक समानता, 2017 कार्य की बदलती दुनिया में महिलाएं ,2018 ग्रामीण और शहरी कार्यकर्ता द्वारा महिलाओं के जीवन में बदलाव, 2020 में नारी सशक्तिकरण के नए उपलक्ष्य में है, मैं जनरेशन इक्वेलिटी महिलाओं के अधिकारों को महसूस कर रही हूं वास्तव में महिलाओं के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को याद दिलाता है, हम सब को मिलकर महिलाओं को भी उनका अधिकार दिलाने के लिए कार्यरत रहना चाहिए। वर्तमान युग को नारी के उत्थान का युग कहां जाए, तो कोई अतिकथनी नहीं होगी, आज हमारे देश भर की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी विजय की पताका फैला रही है और मौजूदा सरकारी भी महिलाओं को हर क्षेत्र में अपना भविष्य निर्माण करने का अवसर उपलब्ध करा रही है। महिलाओं के संदर्भ में जयशंकर प्रसाद की एक खूबसूरत कविता भी है :- नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पग तल में ,पीयूष स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में।

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Thursday, 9 April 2020

दोस्ती (कविता) - अमित डोगरा

दोस्ती

(कविता)
दोस्ती क्या है?
दोस्ती एक एहसास है,
जो बिन बोले
सब कुछ समझ जाती है।

दोस्ती क्या है?
दोस्ती एक प्यार है,
जो हर नफरत को
भूला देती है।

दोस्ती क्या है?
दोस्ती एक खुशी है,
जो कभी हमें
मायूस नही होने देती है।

दोस्ती क्या है?
दोस्ती एक मुस्कुराहट है,
जो हर गम
भुला देती है।

दोस्ती क्या है?
दोस्ती ईश्वर का
सुनहरी उपहार है ,
जो बड़े भाग्य से मिलती है
-०-
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Wednesday, 25 March 2020

कोरोना वायरस का बढ़ता प्रकोप (आलेख) - अमित डोगरा


कोरोना वायरस का बढ़ता प्रकोप

(आलेख)
मध्य चीन के वुहान शहर में 2019 के मध्य दिसंबर से एक नए किस्म के कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत हुई है ।एक अनुमान के अनुसार यह देखा गया कि बहुत से लोगों को बिना किसी कारण निमोनिया होने लगा और पीड़ित लोगों में से अधिकतर लोग हुआन सीफूड मार्केट में मछली भेजते हैं तथा जीवित पशुओं का भी व्यापार करते हैं ।20 जनवरी 2020 को चीनी प्रीमियर लीग केकियांग ने नोबेल कोरोना वायरस के कारण फैलने वाली निमोनिया बीमारी को नियंत्रित और रोकने के लिए प्रभावी और निर्णायक प्रयास करने का आग्रह किया है। इस वायरस से चीन में मानव से मानव संचरण के अधिक प्रमाण है । इसके अतिरिक्त ताइवान, दक्षिण कोरिया ,थाईलैंड, मकाऊ,सिंगापुर नाम मे भी इस वायरस की पुष्टि के मामले सामने आए हैं ।इस वायरस में पीड़ित व्यक्ति में बुखार ,खांसी, सांस की तकलीफ और दस्त हो सकते हैं और मामूली से बहुत गंभीर भी हो सकते हैं ।2019 -n cov के प्रसार को रोकने के लिए कम से कम 20 सेकंड के लिए साबुन और पानी से हाथ धोएं, खासकर बाथरूम जाने के बाद, खाने से पहले और नाक बहने के बाद, खांसने या छीकने के बाद भी। यदि साबुन और पानी आसानी से उपलब्ध नहीं है तो अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का उपयोग भी कर सकते हैं। 2019 -n cov होने के संदेह वाले रोगियों के साथ सीधी बातचीत करने वाली हेल्थ केयर पेशेवरों को सलाह दी जाती है ।जनसाधारण से अनुरोध है कि उनकी अपनी सुरक्षा उनके अपने हाथों में है इसलिए पूरी सावधानी से प्रत्येक वस्तु का प्रयोग करें ।

-०-
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Monday, 11 May 2020

इंतज़ार (कविता) - अमित डोगरा


इंतज़ार
(कविता)
इंतजार क्या है?
इंतजार से पूछो इंतजार क्या है?
इंतजार क्या है
मुझसे पूछो ?
उसके आने से पहले भी
उसका इंतजार था,
उसके आने पर भी
उसका ही इंतजार है,
उसके पास बैठने पर भी
उसका ही इंतजार था ,
उसके साथ चलने पर भी
उसका ही इंतजार है,
उसके जाने के बाद भी
उसका ही इंतजार है ,
आज भी उसका इंतजार है,
जीवन के अंतिम क्षणों तक
उसका ही इंतजार रहेगा ।।
-०-
पता:
अमित डोगरा 
पी.एच डी -शोधकर्ता
अमृतसर

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Saturday, 25 April 2020

नफ़रत (कविता) - अमित डोगर

नफ़रत

(कविता)
नफरत ने जीना
सिखा दिया,
नफरत ने जिंदगी पथ पर
चलना सिखा दिया,
नफरत ने सही गलत का
अंतर करना सिखा दिया,
नफरत ने स्वय से प्यार
करना सिखा दिया,
नफरत ने मंजिल को
पाने के लिए
आगे बढ़ना सिखा दिया,
नफरत ने रिश्तो को
निभाना सिखा दिया,
नफरत ने दिव्या ज्ञान को
ग्रहण करना सिखा दिया,
नफरत ने ईश्वर के होने का
एहसास सिखा दिया।
-०-
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अमित डोगरा 
पी.एच डी -शोधकर्ता
अमृतसर

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सृजन रचानाएँ

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

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पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
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सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

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