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Wednesday, 20 November 2019

मेरे उद्धरण (क्षणिका) - ओट्टेरी सेल्वाकुमार

मेरे उद्धरण
(क्षणिका)
इस आकाश के नीचे
मेरा सपना उड़ रहा है
हाँ यह आपके लिए है
आज ही नहीं
कल के लिए
पता: 
ओट्टेरी सेल्वाकुमार
चेन्नई (तमिलनाडु)
-०-

***
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इल्म रखना (हाइकु गीत) - अनिला राखेचा


इल्म रखना
(हाइकु गीत)

ढ़लता रवि
साँझ का पल्लू लिये
तुमसे मिली

करवट ली
और तुम आ गए
जिंदगानी में

बेहतरीन
लम्हों का करवाँ ले
वक्त आ गया

सूनेपन को
कैद करवा दिया
कारागार में

थिरक उठी
रुकी जिंदगी मेरी
लेते बलैयाँ

बीज बो दिए
बंजर जमीं पर
इसरार के

कारनामे जो
तुमने दिखलाए
जज्बातों भरे

जी उठी पुन:
और पड़ गई मैं
तेरे प्यार में

रास्ते दूर थे
मंजिलों का भी न था
कोई ठिकाना

तुमको माना
खुदा हमने अब
इल्म रखना

इल्तजा मेरी
बस वफा निभाना
दूर ना जाना !!
-०-
अनिला राखेचा
कूचबिहार (पश्चिम बंगाल)


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Tuesday, 19 November 2019

अनहोनी (लघुकथा) - श्रीमती सरिता सुराणा

अनहोनी
(लघुकथा)
" मम्मी - मम्मी ! इस बार तो हमारे यहाँ राजा भैया ही आएगा ना । मैं उसके साथ खूब खेलूंगी ।" झूमते हुए नन्ही शालू ने अपनी मम्मी के गले में अपनी सुकोमल बांहें डाल दी ।
"आपसे ये किसने कहा बेटे ? " मम्मी ने पूछा ।"
" वो सुबह दादी मां पापा से कह रही थी कि इस बार बहू के राजा बेटा ही होना चाहिए ।अगर फिर लङकी हुई तो उसका एबॉर्शन करवा देंगे ।मम्मी - मम्मी ये एबॉर्शन क्या होता है ? "
" कुछ नहीं बेटा " - कहकर प्रिया ने शालू को कसकर अपनी छाती से चिपका लिया ।एक बार फिर किसी अनहोनी की आशंका से वह अन्दर तक कांप गई ।
-०-
श्रीमती सरिता सुराणा
हैदराबाद (तेलंगाना)
-०-

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पाप का भागी (लघुकथा) - डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा

पाप का भागी
(लघुकथा)
"राम-राम पंडित जी।"
"राम-राम सरपंच जी।"
"पंडित जी, रहने दीजिए। आप क्यों झाड़ू लगा रहे है। मैं स्वीपर बुलाया हूँ। वह कल सुबह आकर सफाई कर देगा। आप यूँ सफाई करेंगे, तो हमें पाप चढ़ेगा।"
"सरपंच जी, स्वीपर अपने टाइम पर आएगा सफाई करने। आज के रथ यात्रा में लगे मेले के कारण यहाँ बिखरे पड़े ये प्लास्टिक के बॉटल, कैरी बैग्स और पेपर-प्लेट्स, जिनमें खाने-पीने की चीजें लगी हैं, तुरंत न हटाएँ, तो निरीह जानवर इन्हें खाकर बीमार पड़ सकते हैं। मर भी सकते हैं। उसका पाप नहीं लगेगा हमें ?"
"ओह, हाँ, ये तो मैंने सोचा ही नहीं। रुकिए, मैं भी एक झाड़ू लेकर आता हूँ।"
-०-
पता: 
डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
रायपुर (छत्तीसगढ़)

-०-

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बच्चे हैं भविष्य (गीत) - अख्तर अली शाह 'अनन्त'

बच्चे हैं भविष्य
(गीत)
बच्चे हैं भविष्य अनदेखी ,कभी न उनकी पीर रहे।
स्वर्णिम भारत की नजरों में सुंदर सी तस्वीर रहे ।।

बच्चे ही कल युवा बनेंगे ,युवा देश निर्माता हैं ।
अच्छे बच्चे ही तो अच्छे देश के जीवनदाता हैं ।।
संस्कारित बच्चों का होना इसलिए आवश्यक है
पढ़ना लिखना पोषण पाना बच्चों का लोगों हक है ।।
गलत राह पर चले ना जाएं अच्छी हर तासीर रहे।
स्वर्णिम भारत की नजरों में सुन्दर सी तस्वीर रहे ।।

जीवन जीने का हक उनका पहला हक कहलाता है।
बच्चे ही हैं नींव समझ क्यों हमें नहीं ये आता है ।।
इनका पोषण लालन पालन देश की जिम्मेदारी है।
पूर्व जन्म के इन्हें मारना बहुत बड़ी गद्दारी है ।।
ये होंगे तो भारत होगा कायम ये जागीर रहे ।
स्वर्णिम भारत की नजरों में सुंदर सी तस्वीर रहे।।

है विवाद संरक्षण के हित मात पिता में दुखदाई ।
कौन रिक्तता भर पाएगा कौन कहो पाटे खाई ।।
बच्चों के कल्याण के खातिर त्याग जरूरी करें।
सभी बच्चों को हानि न पहुंचे परम पिता से डरे सभी ।।
पुख्ता बच्चों के खातिर नित रक्षा की प्राचीर रहे ।
स्वर्णिम भारत की नजरों में सुन्दर सी तस्वीर रहे।।

है मौलिक अधिकार पढ़ाई भूल गए दुःख पाएंगे।
पैरोकार अंधेरों के जो ,सूरज कहाँ उगाएंगे ।।
"अनंत" शिक्षा से कतरा कर लोगों सफल नहीं होंगे ।
होगी कहां तरक्की बोलो क्या हम विकल नहीं होंगे।।
काट अंधेरा देता सूरज बनकर जब शमशीर रहे ।
स्वर्णिम भारत की नजरों में सुन्दर सी तस्वीर रहे ।।
-0-
अख्तर अली शाह 'अनन्त'
नीमच (मध्यप्रदेश)
-०-

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