*** हिंदी प्रचार-प्रसार एवं सभी रचनाकर्मियों को समर्पित 'सृजन महोत्सव' चिट्ठे पर आप सभी हिंदी प्रेमियों का हार्दिक-हार्दिक स्वागत !!! संपादक:राजकुमार जैन'राजन'- 9828219919 और मच्छिंद्र भिसे- 9730491952 ***

Wednesday, 8 January 2020

घर (कविता) - डा. वसुधा पु. कामत (गिंडे)

घर
(कविता)
घर ही एक काशी है
मन ही एक मंदिर है ।

घर मे रहनेवाले सारे
भगवान के समान है ।

घर आगंन की तुलसी
घर की बेटी होती है ।

घर का चमकता दिपक
घर का बेटा होता है ।

घर मे आनेवाले अतिथि
भगवान समान होते है ।

घर के माता-पिता
शक्ति स्वरूप होते है ।

घर की शांति ही
घर की शोभा होती है ।

घर की हर एक स्री
माँ के समान होती है ।

घर की हर बहू
माँ लक्ष्मी समान होती है ।

जिस घर में स्त्री होती गुणी
होता है घर में हर कोई सुखी ।

प्रेमभाव से बंधा
घर , घर कहलाता है ।
-०-
पता :
डा. वसुधा पु. कामत (गिंडे)
बेलगाव (कर्नाटक)  


-०-

***
मुख्यपृष्ठ पर जाने के लिए चित्र पर क्लिक करें 

अपना दायित्व पूरा करें (कविता) - संगीता ठाकुर (नेपाल)


अपना दायित्व पूरा करें
(कविता)
बच्चे हमारे
भविष्य है
वे ही सृष्टि के
नीव है ।
मानव जीवन के
स्तम्भ है
वे नवयुग के
कर्णधार है ।
कल के इस धरातल पे
आज अंकुरित
बीज है ।
भविष्य में सुन्दर मीठे फल के
आज के होनहार
रिष्ट पुष्ट स्वच्छ वृक्ष है ।
चलो आओ हम
आज उन्हे
अपने सुन्दर कर्मो के छाव तले
शितल ममता और संस्कारों से
भेद–भाव रहित निर्मल
मन के धारो से
दिनरात उन्हे हम
खूब सिंचे
शिक्षा, दिक्षा और स्नेहो से
उनका जड़ मजबूत करे ।
भविष्य अपना उज्ज्वल करे
मानव जीवन
सुदृढ़ करे
नयावर्ष में नवसंकल्प करे
विश्व के नन्हे
सुरक्षित करे
अपना दायित्व पूरा करे ।।
-०-
संगीता ठाकुर
ललितपुर (काठमांडू - नेपाल)



***
मुख्यपृष्ठ पर जाने के लिए चित्र पर क्लिक करें 

नववर्ष (गीत) - अशोक 'आनन'

नववर्ष
(गीत)
नवजात शिशु - सा 
चंचल - चपल 
सुकुमार 
नव - वर्ष !
शरद शशि - सा 
नवल - धवल 
तमहार
नव-वर्ष !
हृदय प्रिय मां - सा 
सरल - तरल 
मनुहार
नव - वर्ष !
राम - कृष्ण - सा
अजर - अमर 
अवतार
नव - वर्ष !
-०-
पता:
अशोक 'आनन'
शाजापुर (म.प्र.)

-०-




***
मुख्यपृष्ठ पर जाने के लिए चित्र पर क्लिक करें 

लो आ गया नया ज़माना (कविता) - सहज सभरवाल

लो आ गया नया ज़माना
(कविता)
लो आ गया नया ज़माना,
स्वच्छ भारत बन गया है एक बहाना।

क्या भारत की स्वच्छता का इरादा ,
टूट रहा है यह स्वच्छ भारत का वादा।

सैलानी हैं आते यहाँ,
दिखती है गंदगी देखें जहाँ ।

क्या वैष्णो देवी की पवित्र पहाड़ियां,
लिपटी जो रहतीं हैं, बर्फीली साड़ियां ।

एवं मनुष्य की अपवित्रता का साथ,
दया करो हम पर तो भैरवनाथ ।

इसी गंदगी का करना है अंत,
तभी काम करेंगी भक्ति और मेलों में प्रभु या संत ।
-०-
पता:
सहज सभरवाल
जम्मू-कश्मीर

-०-

***
मुख्यपृष्ठ पर जाने के लिए चित्र पर क्लिक करें 

वो हिंदुस्तानी था (कविता) - राजेश सिंह 'राज'

वो हिंदुस्तानी था
(कविता)
हुड़दंग देख कर , लगता है
तू भारत का इस्लाम नहीं
दुनियां जाने, उसके 'सर' पे
कोई भी, इल्जाम नही

चढ़ी कढ़ाई, छोड़ के दौड़ा
'गिरा' जो, रामू काका था
गोद मे लेके घर तक छोड़ा
वो अब्दुल था, कोई और नहीं

दीप दिवाली, पान दसहरा
होली का, रंग भी चढ़ता था
ढ़ोल ताजिये साथ बजाते
वो राजू था, कोई और नहीं

दुःख सुख दोनों मिलकर बांटे
बात बड़ी या छोटी हो
इल्जाम नही, दोनों ने सीखा
वो हिंदुस्तानी था कोई और नही
-०-
राजेश सिंह 'राज'
बाँदा (उत्तरप्रदेश)

-०-

***
मुख्यपृष्ठ पर जाने के लिए चित्र पर क्लिक करें 

सृजन रचानाएँ

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ