*** हिंदी प्रचार-प्रसार एवं सभी रचनाकर्मियों को समर्पित 'सृजन महोत्सव' चिट्ठे पर आप सभी हिंदी प्रेमियों का हार्दिक-हार्दिक स्वागत !!! संपादक:राजकुमार जैन'राजन'- 9828219919 और मच्छिंद्र भिसे- 9730491952 ***

Tuesday, 17 March 2020

ईमानदारी (लघुकथा) - हिमानी भट्ट


ईमानदारी
(लघुकथा)
दिन की बात है, स्कूल में लंच का समय हुआ। सभी दोस्त टिफिन खाने बेठे। दोस्तो ने रवि को बोला। चलो रवि लंच करते हैं, रवि बोलता हैं, तुम लोग करो मैं कैंटीन से सामान लेकर आता हूं। रवि कैंटीन में जाकर समोसा खरीदता है, कैंटीन में ज्यादा भीड़ होने के कारण दुकानदार ज्यादा पैसे वापस कर देता है। रवि खुश हो जाता है। वाह क्या बात है, समोसा भी खा लिया और पैसे भी बच गए। उसके घर लौटने के बाद थोड़ा सोचता है ,उसे लगता है। यह मैंने गलत किया रवि दूसरे दिन जाता है ।दुकानदार को पैसे वापस कर देता है। वह बोलता है, कल दुकान में ज्यादा भीड़ होने के कारण आपने मुझे ज्यादा पैसा दे दिये थे। दुकान वाला यह देख कर खुश हो जाता है। बेटा तुम बड़े ईमानदार बच्चे हों रवि की ईमानदारी देखकर दुकान वाला खुश हो जाता है। उपहार के रूप में समोसा भेट करता है।
"ईमानदारी एक अच्छी निति है। विपरित परिस्थिति मे भी जो ईमानदारी के पथ पर चलता है , वह भय ओर तनाव से मुक्त रहता है ।।"
-०-
पता 
हिमानी भट्ट
इंदौर (मध्यप्रदेश)
-०-

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गौरया (कविता) - सूबेदार पाण्डेय 'आत्मानंद'

गौरया
(कविता)
मेरे घर की मुंडेर पर गौरैया रहती थी।
रोज सबेरे अपनी भाषा में,आके वो कुछ कहती थी।
चीं चीं चूं चूं करती थी वह, रोज मांगती दाना पानी।
गौरैया को देख मुझे,
आती बचपन की याद कहानी।
आती थी वो नील गगन से,
झुंडों में पंख पसारे।
कभी फुदकती घर आंगन में,
कभी फुदकती द्वारे
चावल औ दानों के टुकड़े,
बीन बीन ले जाती थी।
बैठ घोसलों के भीतर, बच्चोंकी भूख मिटाती थी।
आहट सुन गौरैया की,
बच्चे खुशियों से चिल्लाते थे।
माँ की ममता दानों के टुकड़े,
पाकर निहाल हो जाते थे।
गौरैया का निश्छल प्रेम देख,
मेरी आंखें भर आई थी।
जाने अंजाने माँ की मूरत,
आंखों में मेरी समाई थी।
उस दिन माँ की यादों ने,
मुझको खूब रूलाया था।
एक अबोध नन्ही चिड़िया ने,
प्रेम का पाठ पढ़ाया था।
नहीं प्रेम की कीमत कोई,
और नही कुछ पाना।
अपना सब कुछ लुटा लुटा,
इस दुनिया से जाना।
प्रेम में जीना प्रेम में मरना,
प्रेम मे ही मिट जाना।
ढाई आखर प्रेम का मतलब,
गौरैया से जाना -०-
पता:
सूबेदार पाण्डेय 'आत्मानंद'
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

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कोरोना (कविता) - गीतांजली वार्ष्णेय

कोरोना
(कविता)
कोरोना ,कोरोना,कोरोना
जाओना,जाओना,जाओ ना
खेलेंगें हम रंग लगा के
मानेंगें हम तुमको भगा के
होली में तुमको जिंदा जलाके,
भारत से तुम
जाओ ना,जाओ ना,जाओ ना
कोरोना कोरोना कोरोना।
चाहो तो तुम गुझियाँ खा लो,
चाहो तो तुम भांग चढ़ा लो,
मनाने होली और कहीं तुम
जाओ ना,जाओ ना,जाओ ना
कोरो ना.............
चीन ने तुमको जन्म दिया
पाकिस्तान ने गोद लिया
जाके वहीं पे गुझियाँ खाओ ना
कोरोना, कोरोना,कोरोना।
आये हो तो रंग में रंग दें,
चाहो तो तुम्हें धूल चटा दें
होली की आग से तुम
खेलो ना,खेलो ना, खेलो ना
कोरोना,कोरोना,कोरोना।
जिसने तुमको जन्म दिया
वहीं पे अपना रंग जमा लो,
जाके वहीं पे मेहमानी खालो,
खाके मेहमानी भारत से मेरे
जाओ ना,जाओ ना,जाओ ना
कोरोना, कोरोना,कोरोना।।-०-
पता:
गीतांजली वार्ष्णेय
बरेली (उत्तर प्रदेश)
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बेटी (लघुकथा) - प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे


बेटी
(लघुकथा)
"त्यागी जी,क्या हुआ ?"
" जी,बेटी "
"ओह ! "
"त्यागी जी,घर क्या आया ?
"जी,प्यारी सी बेटी "
"ठीक है"
"त्यागी जी,नया मेहमान क्या है,बेटा या बेटी ?"
"बेटी"
"डोंट माइंड,चलेगा "
"त्यागी जी,क्या खुशख़बरी है ?"
"जी ,लक्ष्मी आई है "
"नाइस,जब लड़की आ ही गई है,तो यही सोचना सही होगा ।"
बहुत देर से त्यागी का मित्र पाल यह सब सुन रहा था ।अंत में उससे रहा नहीं गया,तो पूछ बैठा--"यार त्यागी,तुम्हें हुआ तो बेटा है,पर तुम सबको बेटी क्यों बता रहे हो ? "
"वह इसलिए प्रिय मित्र कि मैं इन नारी-मुक्ति व नारी सशक्तिकरण के संचालकों की असलियत को पहचान सकूूं ।" त्यागी ने टका- सा जवाब दिया ।-०-
प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे
मंडला (मप्र)
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Monday, 16 March 2020

माह फरवरी २०२० की उत्कृष्ट रचनाएँ

सृजन महोत्सव के माह फरवरी २०२० की उत्कृष्ट रचनाएँ 
               आप सभी को बताते हुए हर्ष हो रहा है कि दीपावली के पावन पर्व पर प्रारंभ किए इस पटल पर आज तक दो सौ अस्सी से भी अधिक साहित्यकार एवं उनकी लगभग 800 से भी अधिक रचनाएं प्रकाशित की जा चुकी है. सभी रचनाकारों की विभिन्न विधाओं में प्रेषित और इस पटल पर प्रकाशित रचनाएं मौलिक एवं स्तरीय है, इसमें कोई दोराय नहीं है. आपको बताते हुए हर्ष हो रहा हैं कि मात्र फरवरी २०२० माह में देश-विदेश से लगभग 115 गद्य तथा पद्य विधाओं की रचनाएं प्रकाशित की जा चुकी है. आप सभी सृजन धर्मियों का बहुत ही अच्छा प्रतिसाद, स्नेह और प्रेम मिल रहा हैं. इसके चलते आज तक लगभग 33,400 से भी अधिक  लोगों ने इस पटल को भेट दी है.
              आज इस पटल के माह फरवरी २०२० के सर्वाधिक पसंदीदा गद्य और पद्य विधा की भारतीय रचनाओं के रचना शिल्पियों सहित विदेशी रचना शिल्पियों के योगदान को ध्यान में रखते हुए प्रति माह एक विदेशी रचनाकार को भी सृजन महोत्सव परिवार की और से सम्मानित किया जा रहा है. वह निम्न हैं -
कलुतर (श्रीलंका) से पटल से निरंतर जुडी
दुल्कान्ती समरसिंह जी की कविता 
'शायरी' पर
'विदेशी सृजन शिल्पी'
सम्मान से 
पटल की ओर से सम्मानित करते हुए तथा
 सम्मान पत्र सपुर्द करते हुए हर्ष हो रहा हैं.
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-०-

पद्य विधा में भारत वर्ष के बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) की 
अलका 'सोनी' जी की रचना '!! पलभर छोटा है !!' पर
'पद्य सृजन शिल्पी' 
सम्मान से 
पटल की ओर से सम्मानित करते हुए तथा
सम्मान पत्र सपुर्द करते हुए हर्ष हो रहा हैं.
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-०-
गद्य विधा में भारत वर्ष के आदिपुर (गुजरात) के
विवेक मेहता जी की कहानी  
'गुंडे' पर
'गद्य सृजन शिल्पी'
सम्मान से 
पटल की ओर से सम्मानित करते हुए तथा
 सम्मान पत्र सपुर्द करते हुए हर्ष हो रहा हैं. 
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दोनों सृजन शिल्पियों का एवं हमारे साथ जुड़े सभी साहित्य कर्मियों का
हार्दिक आभिनंदन !!!



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सृजन रचानाएँ

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ