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Saturday, 5 September 2020

शिक्षक (कविता) - रूपेश कुमार


शिक्षक
(कविता)
जीवन के मंत्र है शिक्षक ,
जीवन के तंत्र है शिक्षक ,
शिक्षक हमारे माता-पिता है ,
शिक्षक हमारे गुरु ब्रह्मा है !

शिक्षक हमें राह दिखलाते ,
शिक्षक हमें चलना सिखलाते ,
शिक्षक हमें पढ़ना सिखलाते ,
शिक्षक हमें लिखना सिखलाते !

शिक्षक हमें दिशा दिखलाते ,
शिक्षक हमें खेलना सिखलाते ,
शिक्षक हमारी शान है ,
शिक्षक हमारी पहचान है !

शिक्षक हमें लिखना सिखलाते ,
शिक्षक हमें पढ़ना दिखलाते ,
शिक्षक हमारी शान है ,
हम शिक्षक की पहचान है !

शिक्षक हमारी भाषा है ,
हम उनकी अभिलाषा है ,
हम शिक्षक को आदर करते ,
शिक्षक हमारी आदर स्वीकारते !

निरक्षर को साक्षर बनाते शिक्षक ,
ज्ञान की ज्योति जलाते शिक्षक ,
अंधेरा से उजाले की ओर लाते शिक्षक ,
विश्व का ज्ञान देते है शिक्षक ।

शिक्षक की शिक्षा से हम सब ,
कला , विज्ञान , प्रौद्योगिकी के बारे में समझते ,
ऐसे है मेरे शिक्षक ,
दुनिया को दिखलाते हैं शिक्षक !
-०-
पता:
रूपेश कुमार
चैनपुर,सीवान बिहार
-०-


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गुरुवर महिमा (कविता) - सूर्य प्रताप राठौर


गुरुवर महिमा
(कविता)
ज्ञान दीप की ज्योति से जो दिखलाए कर्तव्य मार्ग हमें
दे कर अमूल्य धन विद्या का बनाए सफल इंसान हमें
नित नए अपने यतन जतनो  से देता सही पहचान हमें
तिथि विशेष है उस गुरुवर को देना है सम्मान हमें।
हर कर अज्ञानता का  अंधेरा देता ज्ञान का प्रकाश हमें
कीचड़ के उस कमल की भांति पढ़ाया संघर्ष का पाठ हमें
नर से नारायण की कंटक राह में कराए सत्य का  ज्ञान हमें
तिथि विशेष है उस दिव्य पुरुष को को देना है सम्मान हमें।
शिशु से शूरवीर की कल्पना में देता सही आधार हमें
नित संघर्षों की कठिन घड़ी में सिखाएं धैर्यता की आस हमें
मानवता की हद में रह कर देता मानवता का ज्ञान हमें
तिथि विशेष में  उस गुरुवर  का देना है  सम्मान हमें।
देता थपकी अंतर्मन को मंझे  कुम्हार सा सहलाए  हमें
काट छांट कर इस माटी को देता नए योग्य आकार हमें
अंधकार में ज्योति बनकर सिखाएं नित नए आयाम हमें
तिथि विशेष है उस दिव्य पुरुष को को देना है सम्मान हमें।
चरण वंदना है उस गुरुवर को दिया सर्वहित का ज्ञान हमें।
शास्त्र शास्त्र के ज्ञान जिसने पहनाया शिखर का ताज हमें
त्याग कर अपने सभी हितों को दिया सर्वहित का ज्ञान हमें
तिथि विशेष है उस गुरुवर को देना है सम्मान हमें।
-०-
सूर्य प्रताप राठौर
सांगली (महाराष्ट्र)

-०-



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जिंदगी का गणित (कविता) - निधि शर्मा



जिंदगी का गणित
(कविता)
गणित
एक डरावना विषय
शिक्षा स्तर तक
इससे पीछा छुडा लेते हैं,
लेकिन
जिन्दगी की गणित
कभी साथ नहीं छोडती।

सुना है
'जिन्दगी की गणित' में
दो और दो का जोड
हमेशा चार नहीं होता,
लेकिन शून्य हो
ये भी तो जरूरी नहीं,
कुछ गणित के खिलाडी तो
बाईस भी बना लेते हैं।

हमारा नजरिया तय  करता है
जीवन की परिस्थितियां
शून्य हैं, या बाईस
जिन्दगी के कप्तान बनो
और हर परीक्षा में सफल रहो
-०-
पता:
निधि शर्मा
जयपुर (राजस्थान)


-०-


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शिक्षक का मानस (कविता) - सपना परिहार


शिक्षक का मानस
(कविता)
शिक्षा की मैं नींव रखूँ
राष्ट्र के नव निर्माता की
ज्ञान की मैं अलख जगाऊँ
विद्या,अध्ययन ,बुद्धि की।

तन और मन से सींचूँ उनको
बगिया की मैं उनको बहार बनाऊँ
वैदिक शिक्षा से लेकर मैं
विज्ञान के हर तर्क सिखाऊँ।

व्यवहारिक शिक्षा की नींव रखूँ मैं
भौतिकता से अवगत कराऊँ
भरत,एकलव्य, लव-कुश जैसे
वीर बहादुर शिष्य बनाऊँ।

मान-,प्रतिष्ठा का मैं न भूखा
बच्चों का मैं अभिमान हूँ
गुरु,सारथी,मार्गदर्शक और
हर विद्यार्थी का ज्ञान हूँ।
-०-
पता:
सपना परिहार 
उज्जैन (मध्यप्रदेश)


-०-
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शिक्षक (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'


शिक्षक
(कविता)
कोरोना महामारी के दौर में भी, 
शिक्षक विद्यालय जाते हैं।

हम बच्चे घर पर बैठे उनसे,
ऑनलाइन शिक्षा को पाते हैं।

हम होते बच्चे कोरे कागज़,
जिस पर ज्ञान अमिट वो लिखवाते हैं।

जाति-धर्म और ऊँच-नीच के,
मतभेद को मन से मिटवाते हैं।

सफलता की राह हमको कैसे है पानी,
और कैसे चढ़ना शिखर बताते हैं।

है सच्चाई ये शिक्षक ही स्कूलों में,
बच्चों को अच्छा इंसान बनाते हैं।

आदर्शों और नैतिकता का,
वो पाठ हमें पढ़ाते हैं।

नए प्रेरक आयामों नवाचार से,
बच्चों को सृजनशील बनाते हैं।

हर कठिनाई की राह दिखाते,
हर मुश्किल में खड़े हो जाते हैं।
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)
-०-

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