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Sunday, 2 August 2020

कहानी तो अच्छी (ग़ज़ल) - रेणू अग्रवाल


कहानी तो अच्छी
(ग़ज़ल)
कहानी तो अच्छी सुनाई आपने।
सुनाकर ली अँगड़ाई आपने ।

क्या कहना था क्या सुनना था
बातें तो बहुत बनाई आपने।

हम सुनते रहे तुम सुनाते ही गये
रात हसीन यूँ ही बिताई आपने।

सपने दिखाकर मुझे अपना बनाया
अब क्यों की जग हँसाई आपने।

बहारें चमन और ख़ुश्क खिजाँ
ये तेज़ आँधी क्यों चलाई आपने।

हम तो वैसे ही सो जाते लेक़िन
सहर तक वफ़ा ही जताई आपने।

*रेणू अग्रवाल*
-०-
पता:
रेणू अग्रवाल
हैदराबाद (तेलंगाना)

-०-



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Monday, 17 August 2020

उनके सँग जीना (ग़ज़ल) - रेणू अग्रवाल


उनके सँग जीना
(ग़ज़ल)
उनके सँग जीना मर जाना अच्छा लगता है।
दुनिया में आये कुछ कर जाना अच्छा लगता है।

वहशत सी हुई है शोहरत पाने की
नगमा गीत ग़ज़ल सुनाना अच्छा लगता है।

महफ़िल सज गई है अब चले आओ सनम
तुम्हे देखकर गुनगुनाना अच्छा लगता है।

नज़रों में आपके जो शरारत नज़र आती है
उसे देख देख मेरा शरमाना अच्छा लगता है।

बज़्म में होकर भी जब ख़ुदको तन्हा पाती हूँ
तड़पकर मेरा गीत गाना अच्छा लगता है।

रेणू को आदत हो चुकी है तन्हा रहने की
तुम्हारा बार बार आना अच्छा लगता है।
-०-
पता:
रेणू अग्रवाल
हैदराबाद (तेलंगाना)

-०-



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Sunday, 2 August 2020

वरदानी वृक्ष (कविता) - मानसिंह राठौड़

वरदानी वृक्ष
(कविता)
आठों पहर खड़ा अरण्य में,
शीत गर्मी वर्षा सब सहता है।
धीरजवान उस वृक्ष को देखो,
किसी से कुछ नही कहता है ।

फल,फूल और छाया देता सदा,
प्राण वायु का करता संचार है।
संजीवन रूपी वह वृक्ष निराला,
जो मानुष जीवन का आधार है ।

बादल भी पाकर नमी वृक्षों से,
रिमझिम पानी बरसा जाता है।
वरदानी वृक्ष बनकर किसानों के,
मुस्कान होठों पर ले आता है ।


थके पथिक को राहत देता,
पक्षियों का वह घर बसेरा है।
उछल-कूद करते बच्चों का,
बाल लीलाओं का एक घेरा है ।

कभी नीम नारायण बनकर
रूप भगवान का धरता है ।
कभी धरकर रूप तुलसी का
घर आँगन पावन कर जाता है ।।
-०-
पता:
मानसिंह राठौड़
बाड़मेर (राजस्थान)

-०-



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