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Saturday, 3 July 2021

बारिश की रूमानी फुहार (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'


बारिश की रूमानी फुहार
(कविता)
बारिश की आई रूमानी फुहार,
हुआ है मदहोश दिल बेकरार।

प्रेमी संग प्रेमिका गाए प्रेमगीत मल्हार,
आसमां भी हो रहा खूब गुलज़ार।

मौसम अंगड़ाई लेता आती बहार,
वो पगली मुस्कुराती बार बार।

प्रेमप्रसून खिल रहे हृदय में,
सावन में बरसे बेशुमार प्यार ही प्यार।

अरमान~ए~गुल खिले दिल लगा महकने
प्यार की रौनक है प्यार ही उपहार
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

-०-

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Friday, 1 January 2021

नया साल (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'

  

नया साल
(कविता)
नया साल हो नया राग हो,
स्नेह खुशी और अनुराग हो।

सारी परेशानी रहें दूर अब,
कोरोना का काम तमाम हो।

हे ईश्वर सबको अच्छी सौगात दो,
नववर्ष पर खुशियों का प्रभात हो।

सबका जीवन में विकास हो,
नया जोश नया उल्लास हो।

नैतिकता का सदा साथ हो,
सबके सिर पर बड़ों का हाथ हो।

ऊँच नींच भेदभाव के अंतर को मिटा दो,
नई सोच रखकर जीवन में सबको गले लगा लो।

द्वेष ग्लानि और क्रोध को इस 2020 में त्याग दो,
इक्कीस हो सबसे इक्कीस अपनत्व भाव प्यार हो।
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

-०-

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Tuesday, 29 December 2020

जीवन में (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'

 

जीवन में
(कविता)
घृणा बढ़ रही है चहुँओर 
प्रेम घट रहा है जीवन में

घृणा में घृणा के ही योग से
घृणा का गुणनफल हो रहा है जीवन में

प्रेम शान्ति का बिगड़ रहा समीकरण
द्वेष का आकृमण बढ़ रहा है जीवन में

क्रूर हिंसा का बढ़ रहा संक्रमण 
मानवता का गणित मानव नहीं सीख रहा है जीवन में
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

-०-

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Sunday, 15 November 2020

फिर मनाएंगे दीवाली (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'

 

फिर मनाएंगे दीवाली
(कविता)
पापा जल्दी ठीक हो जाओ,
फिर मनाएंगे दीवाली।

घर को जल्दी तुम लौट आओ,
फिर मनाएंगे दीवाली।

तुम बिन घर सारा सूना है,
जैसे हो सब वीराना है।

हँसी मुस्कुराहट संग ले आओ,
फिर मनाएंगे दीवाली।

तुम बिन हम अधूरे हैं,
तुमसे ही हम पूरे हैं।

घर की रौनक दे जाओ,
फिर मनाएंगे दीवाली।

मेरी यही प्रार्थना रब से,
पापा तुम्हारा हाथ रहे हम सब के सर पे।

कुशल-मंगल तुम आ जाओ,
फिर मनाएंगे दीवाली।
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

-०-

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Monday, 5 October 2020

बेटी (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'

बेटी
(कविता)
स्वागत के साथ आने दो बेटी,
घर-घर में भाग्य लाती है बेटी।

मुस्काए तो लगती सुमन बेटी,
अंधकार में उजाले की किरण बेटी।

चिड़िया की तरह चहकती है बेटी,
पढ़लिख कर इतिहास रचती है बेटी।

निश्चल मन उसका नदी जैसा,
नाज़ों से पालो परी होती बेटी।

बेटे की तरह पढ़ाओ बेटी,
कम न कभी आँको बेटी।

सुख का नया सवेरा लाती बेटी,
आशा का दीप नित जलाती बेटी।

थककर आएं पिता जब घर पर,
दौड़कर जलपान कराती बेटी।

बड़े जब ध्यान न रखें अपना,
खूब डाँट लगाती बेटी।
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

-०-

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Monday, 14 September 2020

हिन्दुस्तान में हिन्दी का हो रहा पतन (हिंदी) - अतुल पाठक 'धैर्य'


हिन्दुस्तान में हिन्दी का हो रहा पतन
(कविता)

जगह जगह अंग्रेजी मीडियम स्कूल की लग गई खूब कतार
हिन्द के देश में हिन्दी के संग हो रहा अत्याचार

जहाँ देखों नज़र वहीं आता अंग्रेजी संस्थान
पिछड़ रही है हिन्दी भाषा नहीं हो रहा उत्थान

क्या यह वही हिन्दुस्तान वतन है
जहाँ पर हिन्दी का हो रहा पतन है

आज अपने ही घर में हिन्दी हो रही पराई है
हिन्दुस्तान में रहने वालों को ही हिन्दी में लगती बुराई है

हिन्दी से हिन्दुस्तान में इस क़दर गर परहेज न होता
तो लाखों की तादाद में बच्चा हिन्दी में ही अनुत्तीर्ण न होता

आज हम लोगों की वजह से हिन्दी की ऐसी दुर्दशा हई है
कि मातृभाषा हिन्दी अपनी ही मातृभूमि पर शर्मिंदा हुई है

विनती करती है हिन्दी मुझको दिल से अपनाओ
हिन्दुस्तान की पहचान अपनी हिन्दी को बनाओ

वरना इक दिन ऐसा भी आएगा
हिन्दुस्तान में हिन्दी का भाव खो जाएगा
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

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Saturday, 5 September 2020

शिक्षक (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'


शिक्षक
(कविता)
कोरोना महामारी के दौर में भी, 
शिक्षक विद्यालय जाते हैं।

हम बच्चे घर पर बैठे उनसे,
ऑनलाइन शिक्षा को पाते हैं।

हम होते बच्चे कोरे कागज़,
जिस पर ज्ञान अमिट वो लिखवाते हैं।

जाति-धर्म और ऊँच-नीच के,
मतभेद को मन से मिटवाते हैं।

सफलता की राह हमको कैसे है पानी,
और कैसे चढ़ना शिखर बताते हैं।

है सच्चाई ये शिक्षक ही स्कूलों में,
बच्चों को अच्छा इंसान बनाते हैं।

आदर्शों और नैतिकता का,
वो पाठ हमें पढ़ाते हैं।

नए प्रेरक आयामों नवाचार से,
बच्चों को सृजनशील बनाते हैं।

हर कठिनाई की राह दिखाते,
हर मुश्किल में खड़े हो जाते हैं।
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)
-०-

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Monday, 24 August 2020

जय गणेश (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'



जय गणेश
(कविता)
नया काम कोई भी करता,
जय श्रीगणेश है नाम वो लेता।

सबसे पहले पूजा जाता,
वह हैं ऋद्धि सिद्धि के दाता।

मोदक उनको बहुत है भाता,
हम सबके वह भाग्यविधाता।

मूषक है गणपति की सवारी,
पूजें घर-घर नर और नारी।

शिव पार्वती के राजदुलारे,
गणपति जी सबके हैं प्यारे।

भक्ति करो मन से गणेश की,
हरते हैं सबके दुःख क्लेशजी।

देवलोक के तुम सरताज,
शत-शत नमन करें हे विघ्नराज।
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

-०-

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Saturday, 15 August 2020

तिरंगा भारत की शान (कविता ) - अतुल पाठक 'धैर्य'



तिरंगा भारत की शान
(कविता)
तिरंगा भारत की शान है,
माँ भारती की अमिट पहचान है।

हम देशप्रेमियों के दिल की धड़कन,
यही हमारी जान है।

हिम शिखर पर लहराता,
गौरव राष्ट्र का बतलाता।

हर हिन्दुस्तानी दिल का,
बढ़ाता ये सम्मान है।

इसकी खातिर हर फौजी,
देना अपनी जान है।

हर देशभक्त का सपना,
तिरंगे का मान है।

जो शौर्य की गाथा रचता,
वो दहाड़ता हिन्दुस्तान है।

हर हिन्दवासी की जान,
और वतन का अभिमान है।

तिरंगा भारत की शान है,
माँ भारत की अमिट पहचान है।
-०-
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

-०-

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Monday, 3 August 2020

रक्षाबंधन है राखी का त्यौहार (कविता) - अतुल पाठक 'धैर्य'



रक्षाबंधन है राखी का त्यौहार
(कविता)
अटूट धागों के बंधन में
स्नेह का उमड़ रहा संसार

पूरे जग में सबसे सच्चा
है भाई-बहन का प्यार

यह शुभ दिन आज मनाते
रक्षाबंधन है राखी का त्यौहार

रेशम के धागे से बंधा है
बहना का अनमोल प्यार

हर सावन में आती है
बेशुमार ख़ुशियों की बहार

बहन भाई के लिए दुआ मांगती
यूंही कृपा रखना तारनहार

भाई बहन की रक्षा में
सदा होता खड़ा तैयार

है वादा ये भाई का बहन से
निभाऊं फर्ज़ ये प्यार

सब रिश्तों में अनमोल है रिश्ता
भाई बहन के दिल में बसता

माथे पर रोली तिलक लगाती
भाई की कलाई राखी से सजाती

बदले में अपने भाई से
रक्षा का वादा है पाती

अपने स्नेह भरे हाथों से
भाई को मिठाई खिलाती

फिर भाई से अपने वो
है अमूल्य तोहफ़े पाती

भाई बहन के अटूट विश्वास
स्नेह से सजा सारा संसार

नाम इसका बड़ा ही पावन
रक्षाबंधन है राखी का त्यौहार
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

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Wednesday, 22 July 2020

हरियाली तीज (गीत) - अतुल पाठक 'धैर्य'


हरियाली तीज 
(गीत)
हल्की बूँदों की फुहार है
ये सावन की बहार है

सखियाँ संग झूलन को आईं
आज हरियाली तीज त्यौहार है

झूम उठे दिल झूम बराबर
गीतों के तराने और सावन के मल्हार हैं

यह पावन पर्व है हरियाली तीज का
इस दिन झूलों की लगती खूब कतार है

आया तीज का त्यौहार
सखियाँ भी तैयार हैं

मेहंदी हाथों में रचाई
करे सोलह श्रृंगार हैं

हरी चूड़ी खन-खन है करती
पायल भी छम-छम है बजती

बिंदी की चमक अपार है
आज हरियाली तीज त्यौहार है

मंदिर में दर्शन को जातीं
शिव पार्वती से गुहार लगातीं

होगा अमर सुहाग
आज हरियाली तीज त्यौहार है
पता: 
अतुल पाठक  'धैर्य'
जनपद हाथरस (उत्तरप्रदेश)

-०-

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सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

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