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Saturday, 15 August 2020

नमन चंद्रशेखर (कविता) - व्यग्र पाण्डे


नमन चंद्रशेखर
(कविता)
दैदिप्य चेहरा
मूँछों पर ताव
कांधे जनेऊ
रोवीले भाव
कहने में कम
करने में विश्वास
पिस्टल की भाषा
आती थी रास
आजाद हूँ मैं
शत्रु को जताया
जब तक रहे
प्रण को निभाया
नमन चंद्रशेखर
वंदन चंद्रशेखर
ॠणी देश सारा
स्मरण चंद्रशेखर ।
-०-
व्यग्र पाण्डे
सिटी (राजस्थान)



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Thursday, 2 January 2020

विदाई संग स्वागत (कविता) - व्यग्र पाण्डे



विदाई संग स्वागत
(कविता)
कहने को उन्नीस, इक्कीस से कम नहीं
जा रही हो पर, सदियों भूलेंगे हम नहीं
मान संग स्वाभिमान, हर्ष दिया उत्कर्ष
देश हमेशा ॠणी रहेंगा हे उन्नीसवीं वर्ष
धूमिल मस्तक किरीट को दमकाया तूने
किये अनेक प्रश्न हल जो पड़े थे जूने
हर हृदय में प्रेम की गंगा तूने खूब बहाई
कुछ-कुछ झेले ताने सदा रही मुस्काई
तुझे विदा करने को हमारा मन ना करता
तेरी प्रशंसा करें कितनी ही मन ना भरता
विदाई संग स्वागत की वेला आन पड़ी है
उन्नीस गयी, बीस द्वार पर आन खड़ी है
जाने वाला गया सबको कुछ यादें देकर
नव-वर्ष आये हमको बहुत मुरादें लेकर
देश-संस्कृति अक्षुण्ण रहे हम सब चाहते
स्वागत में दो हजार बीस हम शीश नवाते
-०-
व्यग्र पाण्डे
सिटी (राजस्थान)

-०-

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Friday, 3 January 2020

सबसे बड़ा है ... (गीत) - व्यग्र पाण्डे


सबसे बड़ा है
(गीत)
प्रेम के फ्रेम में जो जड़ा है
सच मायनों में वो सबसे बड़ा है

सुख-दुख में जो तत्पर खड़ा है
सहयोग का पाठ जिसने पढ़ा है
सच मायनों में वो सबसे बड़ा है

घमंड के फंड से रिक्त है जो
आदर-भाव से सिक्त है जो
सहजता का नशा जिसको चँढ़ा है
सच मायनों में वो सबसे बड़ा है

सच्चाई की ढलाई का लेप है जिस पर
लुटाने को भलाई की खेप है जिस पर
उन्नति के शिखरों पर वो ही बढ़ा है
सच मायनों में वो सबसे बड़ा है

बातों से जिसके झड़ते हो फूल
निंद्रा में भी जिससे ना होती हो भूल
स्वार्थ के लिए जो ना कभी लड़ा है
सच मायनों में वो सबसे बड़ा है
-०-
व्यग्र पाण्डे
सिटी (राजस्थान)

-०-

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Wednesday, 18 December 2019

मुर्गा बोला... (बाल-कविता) - व्यग्र पाण्डे


मुर्गा बोला...
(बाल कविता)
अल सुबह मुर्गा बोला
उठिए मुन्ना राजा
आलस छोड़ मंजन कर लो
हो जाओ नहा कर ताजा
सुबह सुबह चिड़िया बोली
चूं चूं - चीं चीं - चीं चीं
सूरज के आते ही फिर
रात हो गई फीकी
सुबह सुबह हवा बोली
मुन्ना घूमने जाओ
शीतल मंद सुगंधित मुझसे
अपने रोग भगाओ
सुबह सुबह सूरज बोला
देखो मुन्ना आओ
मैं समय पर आ जाता
तुम स्कूल समय पर जाओ ।
-०-
व्यग्र पाण्डे
सिटी (राजस्थान)

-०-

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Sunday, 19 January 2020

लानत (कविता) - व्यग्र पाण्डे


लानत
(कविता)
घर बदले जाति-बिरादरी के कारण
सामान बदले वास्तु-दोष के कारण
लिवास बदले, मित्र भी खास बदले
बहुत कुछ बदला कारण-अकारण
सरकारें बदली दरकारें बदली तू ने
पर बहशीपन ना बदला अपना तूने
फर्क होता जानवर इंसान में कुछ तो
फिर क्यूँ नहीं, स्वयं को बदला तूने
युग बदले बहुत कुछ बदला फिर भी
पर दूषित केंचुली को ना बदला तूने
खुद बदल जाता धरा स्वर्ग बन जाती
अफ़सोस जिसको नर्क में बदला तूने
-०-
व्यग्र पाण्डे
सिटी (राजस्थान)

-०-

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Tuesday, 1 December 2020

मौन साँझ (कविता) - व्यग्र पाण्डे

 

मौन साँझ
(कविता)
सुबह मुखर
मौन सांझ
तपती दोपहरी 
रात बांझ 
      -------
समाधिस्थ पेड़ 
वीरान छांव 
निहारें पखेरू 
ना कांव-कांव
        -------
सर्पिली हवा 
सूरज क्रुद्ध 
दोनों हुए
सबके विरुद्ध 
        -------
व्याकुल सभी 
ग्रीष्म का असर
पंखे - कूलर
सबकुछ बेअसर
          -------
चोटी से एडी
पसीने की धार
तन के कपड़े 
करें तीखी मार
          -------
कवि की कलम
उकेरे चित्र 
गर्मी के रंग 
बड़े विचित्र 
-०-
व्यग्र पाण्डे
सिटी (राजस्थान)

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Wednesday, 13 November 2019

इमरती बड़ी चुलबुली... (बाल-कविता ) - विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

इमरती बड़ी चुलबुली...
(बाल-कविता )

इमरती है बड़ी चुलबुली
सोनपपड़ी रही अकड़ी अकड़ी
कलाकंद दे रहा आनंद
बरफी बिफरे करे फंद
रसगुल्ला कर रहे हल्ला
लड्डू ने झाड़ा है पल्ला
मक्खनबड़ा रहते हैं मौन
खीरमोहन की चल रही पौन
जलेबी रस में डूबी पड़ी
रबड़ी बात करे तगड़ी
मोहनभोग लगे अच्छे
गूँजी दे रही है गच्चे
घर अंदर इनके हाँके हैं
घर बाहर फुलझड़ी पटाखे हैं
लक्ष्मी जी करेगी भली भली
हम मना रहे सब दीपावली
-०-
व्यग्र पाण्डे
गंगापुर सिटी (राज.)

-0-



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Saturday, 26 October 2019

आया दीपावली त्योहार... (गीत) - विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'











आया दीपावली त्योहार... 
(गीत)

आया दीपावली त्योहार
लाया खुशियां बेशुमार ।।
घर-आँगन की साफ-सफाई
दीवारों की हुई पुताई
गली मौहल्ले दमके सारे,
सजे हाट-बाजार...
आया दीपावली त्योहार ।।

रसगुल्लों के हैं हँसगुल्ले
जलेबी नवेली मारे ठल्ले
सोनपपड़ी सोनपरी सी,
कर रही है सत्कार...
आया दीपावली त्योहार ।।

हम माटी के दीयें लगायें
स्वदेशी वस्तु अपनायें
दीप-पर्व पर देशप्रेम के,
हम गावें मंगलाचार...
आया दीपावली त्योहार ।
लाया खुशियाँ बेशुमार ।।
-०-
व्यग्र पाण्डे
कर्मचारी कालोनी,गंगापुर सिटी (राज.)322201


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Friday, 29 November 2019

जस खोजा तस पाईयां ... (कविता) - विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'


जस खोजा तस पाईयां ... 
(कविता)
गुजर गये वो पाँच दिन
त्योहार के
अलग अलग अनुभूति
अलग अलग विचार के
पहला विचार
इकट्ठा हुआ परिवार
बच्चों की खिलखिलाहट संग
मिले बचपन के यार
रसोई में पल्टे के स्वर
साफ-सुथरा हुआ घर
दमकी नव-वसनों से नारी
सौन्दर्य से अमावस हारी
बहुत कुछ देकर गये
त्योहार अपने
लगा इसलिए
सकारात्मक थे विचार अपने
दूसरा विचार
जो सदैव ढूंढ़ता
जीत में भी हार
उसे त्योहार में
उदासी, थकान, खर्च जैसे
दूषण मिलें
वायु संग ध्वनि प्रदूषण मिलें
ये विषाद उनको
सताये जा रहा है
त्योहार तो गया
पर उनके मन का
अवसाद ना जा रहा है
कहा भी गया है -
जस खोजा, तस पाईयां
निज त्योहारां माय...
-०-
व्यग्र पाण्डे
सिटी (राजस्थान)

-०-

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सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

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