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Monday, 11 January 2021

*खामोशियाँ* (कविता) - लक्ष्मी बाकेलाल यादव

  

*खामोशियाँ* 
(कविता)
  इक अलग ही चुभन 
  इक अलग ही एहसास
  कभी सुकून तो
  कभी छटपटाहट
  अपनी ही चुप्पी में
  काफी कुछ कहती
  समझो तो परिचित सी
  ना समझो तो अनजानी
  गुमसुम सी रहती
  कलेजे को चीरती
  मानो या ना मानो
  देती दर्दभरी ये निशानी
  हर इक इन्सान के भीतर
  मिलती इनकी कहानी ।
***
पता:
लक्ष्मी बाकेलाल यादव
सांगली (महाराष्ट्र)

-०-



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*स्वागतम* (कविता) - डॉ. सिम्मी सिंह


*स्वागतम* 

 (कविता)

स्वागतम स्वागतम नव वर्ष की 

नई भोर का स्वागतम स्वागतम


घने कोहरे की जद में है ये जहां

सूर्य के ताप से सुखद हो आबोहवा

 प्रकृति के मनोहर रमणीय रूपका 

     स्वागतम स्वागतम


स्याह रात की बिखरी कालिमा 

लपेटती स्वयं को चहु ओर से

डूबते तारोंसंग उगती उषाकिरण का

  स्वागतम स्वागतम  


हौले हौले अन्धकार मिट रहा 

खिल रही प्रकाश की किरण

ओस की बूंदों से धुली प्रात का              

  स्वागतम स्वागतम


अलसित पलकेंमूंदती खोलती

खग कुल की कलरव से गुंजित

मनको हर्षित करती प्रभात का

 स्वागतम स्वागतम*

-०-

पता 
डॉ. सिम्मी सिंह
उदयपुर (राजस्थान) 


-०-

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शायद तुमको पता नहीं (कविता) - अखिलेश चंद्र पाण्डेय 'अखिल'

   

शायद तुमको पता नहीं,,,
 (कविता)

आकर्षण बेघर कर देगा

शायद तुमको पता नहीं

कब ज़ख्मों को तर कर देगा।

शायद तुमको पता नहीं।।,,,


रोज़-रोज़ का सपना बुनते

नहीं किसी का कहना सुनते,

नये-नये सन्दर्भों को हम

चुनते जाते गुनते-धुनते।

जग सब तितर-बितर कर देगा,

शायद तुमको पता नहीं,,,


कोई मन का मीत न मिलता,

यौवन फिर सुपुनीत न मिलता,

तुम आते यदि नहीं जुबाँ पर,

शब्दों को संगीत न मिलता।

शाप कोई पत्थर कर देगा,

शायद तुमको पता नहीं,,,


तुम मेरा सब नेह छोड़कर,

दूर गए क्यों गेह छोड़कर,

अरमानो के मेह(बादल)मोड़कर

संकल्पों की देह तोड़कर।

-०-
पता 
अखिलेश चंद्र पाण्डेय 'अखिल'
गया (बिहार) 


-०-

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वर्ष 2021 की चुनौतियां (आलेख) - प्रोफेसर शामलाल कौशल

वर्ष 2021 की चुनौतियां
(आलेख)

अब मेरे जीवन की सांझ होने वाली है। मैं बचपन से ही यह सुनता आ रहा कि देश मुश्किल हालात में से गुजर रहा है। 1947 मे जब भारत विभाजन हुआ तो लाखों लोग पाकिस्तान से भारत में और भारत से पाकिस्तान की तरफ गए। ना जाने कितने लोगों को बेरहमी से मार दिया गया, कितनी संपत्ति बर्बाद हो गई, आने-जाने के साधन ध्वस्त हो गए, न जाने कितनी मासूम अबलाओं की आबरू से खिलवाड़ किया गया। पाकिस्तान में रह रहे बहुत सारे हिंदुओं को कत्ल कर दिया गया और उनकी बहू बेटियों के साथ मुसलमानों ने निकाह कर लिया। जो हिंदू मुसलमान बनने के लिए राजी हो गए उन्हें छोड़ दिया गया और बाकियों को मौत के घाट उतार दिया गया। विभाजन के समय पाकिस्तान तथा हिंदुस्तान में जो दंगे हुए उनमें बंगाल के दंगे बहुत खतरनाक थे तभी तो स्वतंत्रता प्राप्ति वाले दिन महात्मा गांधी जी इन दंगों को शांत कराने के लिए बंगाल चले गए थे। विस्थापित लोगों को भारत में बसाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। लेकिन पाकिस्तान से उजड़ कर आए और अपना सब कुछ छोड़कर आई लोगों ने जिस बहादुरी से अपने आप को पुनर्स्थापित किया और आज उनमें से कईयों का नाम उच्च कोटि के लोगों में गिना जाता है, वह एक अनुकरणीय मिसाल है।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश का विकास करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। देश के प्रथम प्रधानमंत्री, जवाहरलाल नेहरू में देश में पंचवर्षीय योजनाओं को शुरू किया तथा देश में सार्वजनिक उद्योगों की आधारशिला रखी, भाखड़ा बांध समेत योजना शुरू की ताकि बिजली का उत्पादन हो सके, बाढ़ें रोकी जा सके तथा कृषि की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके। वर्तमान समय में विश्व के अनेक देशों की तरह भारत में भी जो मंदी की स्थिति है उसका मुकाबला करने में हमारे देश के सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां महत्वपूर्ण रोल अदा कर रही हैं।
जब देश आजाद हुआ तो यह एक पिछड़ा हुआ देश था। अंग्रेजों ने यहां खूब लूटमार की। यहां का धन दौलत इंग्लैंड ले गए और देश में उद्योगों को विकसित नहीं होने दिया गया। देश से कच्चा माल इंग्लैंड जाता था और वहां से बना बनाया उद्योगों का माल आयात किया जाता था। अनाज की कमी थी। भारत को भीख मांगने का कटोरा लेकर अमेरिका के पास पीएल 480 के तहत अनाज मंगवा कर लोगों का पेट भरना पड़ता था। इस बीच भारत के प्रधानमंत्री, बहादुर शास्त्री ने अनाज की समस्या के समाधान के लिए महीने में एक बार शाम के समय लोगों को भोजन ना करने और अनाज को बर्बाद ना करने का सुझाव दिया। 1965 में ही पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया और शास्त्री जी के नेतृत्व में पाकिस्तान को इसका मुंह तोड़ जवाब दिया गया। दोनों देशों में समझौते के लिए रूस की राजधानी, मास्को में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान तथा भारत के प्रधानमंत्री, श्री लाल बहादुर शास्त्री के बच युद्धविराम के लिए समझौता हुआ, लेकिन इसे भारत का दुर्भाग्य ही कहना चाहिए शास्त्री जी का मास्को में ही स्वर्गवास हो गया। इस तरह देश के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई।
भारत को बार-बार अमेरिका से पीएल 48 के तहत अनाज मंगवाने से बहुत शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा। इस समस्या को हल करने के लिए भारत में हरित क्रांति लाई गई जिसके तहत गेहूं, चावल आदि पांच फसलों के उन्नत बीज, खाद और सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध करा कर कृषि का उत्पादन बढ़ाया गया। हम ना केवल अनाज के मामले में आत्मनिर्भर हो गए बल्कि अनाज का निर्यात भी समय-समय पर करने लगी। इस तरह देश ने अनाज की कमी की चुनौती का सामना बहुत ही समझदारी से किया।
इस तरह हमारे देश को समय-समय पर कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है और देश ने उनका संतोषजनक ढंग से समाधान निकाला है।
लेकिन इसके बावजूद भी वर्ष 2021 भारत के लिए चुनौतियों से भरपूर वर्ष लगता है। इन चुनौतियों को हल करने के लिए भारत को आर्थिक, सामाजिक, सैनिक तथा विदेश नीति से संबंधित कुछ अहम फैसले करने होंगे। वर्ष 2020 में कोविड-19 ने देश में बहुत सारे लोगों को संक्रमित ही नहीं किया बल्कि बहुत सारे लोगों को मौत की नींद सुला दिया। संसार के अन्य देशोंकी तरह भारत में भी मंदी के कारण आर्थिक विकास अ पने निम्नतम स्तर पर पहुंच गया लोगों की आमदनी कम हो गई, बेकारी फैल गई, सरकार की आमदनी तो कम होगी लेकिन विभिन्न कारणों से सरकार का खर्चा बढ़ गया। इस तरह से सरकार के लिए वित्तीय संकट खड़ा हो गया। वर्ष 2021 इस दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। सरकार को ना केवल आर्थिकी को पुनर्स्थापित करना है, बेकारी दूर करनी है, लोगों की आय तथा मांग में वृद्धि करनी है बल्कि व्यापार तथा उद्योग को कुछ सुविधाएं देनी है ताकि वे अपने पैरों पर फिर से खड़े हो सकें। सरकार को जहां गैर उत्पादक खर्चों में कटौती करनी पड़ेगी वहां सरकार को अपने राजस्व में वृद्धि करने के लिए भी नए स्रोतों का पता लगाना होगा।
वर्ष 2020 में कोरोनावायरस महामारी ने देश का सत्यानाश कर दिया। लोगों में निराशा ही निराशा पैदा हो गई। बहुत सारे लोग मारे गए, बहुत सारे लोग संक्रमित हो गए। लोगों में हर समय मौत का साया मंडराने लगा। लोगों को अपने घरों में कैदियों की तरह रहना पड़ा, बाहर निकलने पर सोशल डिस्टेंसिंग तथा मास्क का पहनना और बार-बार हाथों को सेनीटाइजर अथवा साबुन से धोना जरूरी हो गया। यह खुशी की बात है कि कोरोनावायरस महामारी को रोकने के लिए अपने ही देश में दो प्रकार की वैक्सीन का आविष्कार कर लिया गया है और उसका प्रयोग आपात स्थिति को देखते हुए किया जा सकता है। भारत द्वारा कोरोना के इलाज के लिए वैक्सीन के आपात प्रयोग को डब्ल्यूएचओ ने अनुमति दे दी है। यह खुशी की बात है कि संसार के कुछ और देश जैसे चीन, रूस, इंग्लैंड आदि देशों ने भी इस महामारी के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार कर ली है। हमारे देश में वैक्सीन को लेकर अनावश्यक राजनीति, आशंका तथा अनिश्चितता की जो स्थिति है उस चुनौती का मुकाबला करना सरकार तथा लोगों के लिए बहुत जरूरी है। आखिरकार कोरोनावायरस महामारी से हमें निजात तो पानी ही पड़ेगी।  इस बीच इंग्लैंड से पहले से भी ज्यादा खतरनाक कोरोनावायरस के कुछ मरीज आने तथा उनके मरने से दुनिया भर में आतंक की स्थिति पैदा हो गई है जो कि एक और प्रकार से चुनौतीपूर्ण कार्य है।
भारत के सामने एलएसी पर चीन के भारी सैनिक जमावड़े का सामना करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। दोनों देशों के बीच लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा घुसकर कुछ इलाकों पर कब्जा करने की समस्या को हल करने के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी हैं। दोनों देशों में 1990 में सीमा को लेकर जो सहमति हुई थी चीन उस पर अमल करने से इंकार कर रहा है। इतना ही नहीं वह दोनों देशों की सीमाओं के साथ-साथ अपने क्षेत्र में सड़कों का निर्माण कर रहा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर अपने सैनिकों को जल्दी-जल्दी वहां पहुंचा कर भारत पर हमला कर सकें। कहने को तो चीन भारत के साथ अपनी समस्याओं को हल करना चाहता है लेकिन वास्तविकता यह है कि एक तरफ तो वह बातचीत करके हमें उलझाए रखना चाहता है और दूसरी तरफ दोनों देशों की सीमा पर भारी मात्रा में सैनिक तथा युद्ध सामग्री तैयार करके भारत को आंखें दिखाने की भी कोशिश कर रहा है। भारत चीन की इस चुनौती को समय आने पर वीरता पूर्वक हल करेगा क्योंकि 2021 का भारत 1962 का भारत नहीं है जब उसने हमें शर्मनाक पराजय दी थी। हमें चीन की चुनौती का मुकाबला करने के लिए ना केवल अपने आप को सैनिक दृष्टि से मजबूत करना पड़ेगा बल्कि चीन से मंगवाई जाने वाली वस्तुओं को अपने देश में पैदा करके आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। बहुत सारी विदेशी कंपनियां चीन से भारत में निवेश करना चाहती हैं, हमें उन्हें अधिक से अधिक सुविधाएं देकर उनका स्वागत  ही नहीं करना चाहिए बल्कि चीन के मुंह पर एक थप्पड़ भी मारना चाहिए। भारत को चीन को लेकर अपनी विदेश नीति में इस तरह से तब्दीली करनी चाहिए की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसको अपना मुंह छुपा ना मुश्किल हो जाए।
   1947 में भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान ने हमें चैन से नहीं रहने दिया! जम्मू कश्मीर के महाराजा, हरि सिंह के द्वारा लिखित तौर पर देने के बाद कि उनका राज्य भारत में विलय चाहता है, श्रीनगर और कश्मीर में मुस्लिम बाहुल्य को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान ने इस पर कब्जा करने के लिए अपने सैनिकों को मुजाहिदीन के तौर पर भेज दिया और उन्होंने कश्मीर के एक भाग पर बलात कब्जा कर लिया जो कि आज तक भी कायम है जिसे कि आजाद कश्मीर कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के द्वारा दोनों देशों में कश्मीर को लेकर युद्धविराम हुआ। लेकिन पाकिस्तान अभी भी कश्मीर को किसी न किसी प्रकार से हमारे से छीनना चाहता है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए भारत तथा पाकिस्तान में 1965, 1971 तथा 1999 में युद्ध हुए जिसमें भारत में पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया। 1971 के युद्ध में हमारे सैनिकों ने ऐसी व्यूह रचना बनाई कि पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश के तौर पर एक अलग देश बन गया। भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के 90000 सैनिकों को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया। अब भी समय-समय पर यही पाकिस्तान भारत में अपने यहां प्रशिक्षित आतंकवादियों को तोड़फोड़ की कार्रवाई के लिए भेजता रहता है, युद्ध विराम का उल्लंघन करके नागरिक क्षेत्रों पर बमबारी करता रहता है, जम्मू कश्मीर में वहां के निवासियों को भारत के खिलाफ बगावत करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा। उसे सबक सिखाने के लिए हमारे सैनिकों ने सर्जल स्ट्राइक कर के आतंकवादी के ठिकानों को नष्ट किया है। भारत के साथ युद्धकी स्थिति बनाए रखने के कारण तथा आतंकवाद का केंद्र होने के तौर पर बदनाम होने के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में उसे आर्थिक सहायता मिलनी बंद हो गई है, पाकिस्तान के आंतरिक क्षेत्रों में असंतोष और आतंकवाद अपनी चरम सीमा पर है। पाकिस्तान है कि वह अपनी भारत विरोधी शत्रुता तथा आतंकवादी तत्वों को जम्मू कश्मीर में तोड़फोड़ करने से बाज नहीं आता। 2021 की हमारी यह चुनौती रहेगी कि हम पाकिस्तान को हमेशा के लिए सबक सिखा कर उसे सही रास्ते पर लाएं। अगर दोनों देशों में युद्ध हुआ तो पाकिस्तान के कई टुकड़े हो जाएंगे।
भारत को अपनी विदेश नीति में परिवर्तन करना भी 2021 की एक बहुत बड़ी चुनौती होगी। हमें अपने पड़ोसियों जैसे नेपाल, श्रीलंका, मालदीप, म्यांमार आदि के साथ सौहार्द पूर्ण संबंध बनाने होंगे। चीन के द्वारा इन देशों में सैनिक ठिकाने बनाकर भारत को घेरने की कोशिश को निष्क्रिय करना होगा। हमें इन देशों में आवश्यक आर्थिक सहायता तथा निवेश के द्वारा अपनी जगह बनानी होगी। इसके अलावा भारत को ईरान के साथ संबंध और सुदृढ़ करने पड़ेंगे! क्योंकि ईरान अफगानिस्तान में तालिबान की हरकतों को पसंद नहीं करता! संबंध सुधरने की स्थिति में वह तालिबानियों को नियंत्रित करने में मदद करेगा। क्योंकि कभी ना कभी तो अमेरिका तथा उसके सहयोगी देश अपनी अपनी सेनाओं को अफगानिस्तान से निकाल ही लेंगे ऐसी स्थिति में भारत को अफगानिस्तान के सैनिकों को प्रशिक्षण देने तथा वहां पर विकासात्मक एवं कल्याणकारी कार्यों के लिए निवेश करने का मौका मिलेगा। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान तथा चीन अफगानिस्तान में अपना हस्तक्षेप बनाने की कोशिश करेंगे जिसे कि भारत को रोकना होगा। अरब देशों के साथ कुल मिलाकर भारत के सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। पाकिस्तान की छवि मुस्लिम देशों में दिन प्रतिदिन धूमिल होती जा रही है। सुरक्षा तथा कृषि संबंधी सहायता प्राप्त करने के लिए भारत के लिए इसराइल के साथ संबंधों को और सुदृढ़ बनाना एक चुनौती रहेगी। भारत और रूस के आपसी संबंध दीर्घ काल से ही सौहार्दपूर्ण रहे हैं।
भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से अमेरिका के साथ संबंधों को सुदृढ़ बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती रहेगी। अमेरिका के सभी राष्ट्रपति भारत के पक्ष में नहीं रहे। कुछ की नीति चीन के प्रति उदार रही जबकि कुछ अमेरिकन राष्ट्रपतियों ने कश्मीर के मामले में पाकिस्तान का साथ दिया। लेकिन बराक ओबामा के समय से भारत और अमेरिका के संबंध लगातार सुधरते रहे हैं। दोनों देशों में परमाणु कार्यक्रम तथा रक्षा संबंधी कई समझौते हुए। निवर्तमान राष्ट्रपति, डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी के बीच में निकटतम व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। आशा की जानी चाहिए कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बा्इडन के शासनकाल में दोनों देशों में संबंध और सुदृढ़ होंगे। अमेरिका ना केवल पहले की तरह भारत को सामरिक दृष्टि से सहायता देता रहेगा बल्कि सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने में मदद भी करेगा। भारत संयुक्त राष्ट्र का मौलिक सदस्य हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब इसकी स्थापना हुई थी तो भारत इसका सदस्य बना था। भारत संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है उसके लिए सुरक्षा परिषद का सदस्य बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी। भारत एक परमाणु संपन्न देश है, विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था है, विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, इसका महत्व अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रों में दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। आशा करनी चाहिए कि अमेरिका कश्मीर के मामले में भारत का समर्थन करेगा।
  इस तरह वर्ष 2021 को लेकर भारत को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जिस तरह अतीत में हमने सभी चुनौतियों का सफलतापूर्वक निदान किया है तथा समाधान किया है आशा है कि इस वर्ष भी हम देश के समक्ष चुनौतियों को बहुत आसानी से हल कर लेंगे। इस समय जो खेती से संबंधित 3 कानूनों को लेकर पंजाब, हरियाणा, यूपी तथा देश के अन्य भागों के किसानों के द्वारा दिल्ली में जो आंदोलन किया जा रहा है आशा की जाती है इसका सौहार्दपूर्ण हल इस तरह निकाल लिया जाएगा के किसान संतुष्ट होकर अपनी-अपनी घरों में वापस जा सके। हर देश के सामने हर साल अपने-अपने ढंग से चुनौतियां आती हैं और सभी देश विवेकपूर्ण ढंग से उनको हल करने की कोशिश करते हैं।
-०-
पता: 
प्रोफेसर शामलाल कौशल
रोहतक (हरियाणा) 

-०-

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Sunday, 10 January 2021

हिन्दुस्तान हम सबका है (कविता) - रोशन कुमार झा

 

हिन्दुस्तान हम सबका है 

(कविता)
सब मामला खुदा मसीहा भगवान की है,
दो हजार उन्नीस से बीस हुए ये नया वर्ष हम इंसान की है !
पूजा पाठ कला और विज्ञान की है,
मंदिर गुरुद्वारे ,चर्च मस्जिद है जहां वह सर्वभूमि
हिन्दुस्तान की है !

अटल और कलाम की है,
रहीम और राम की है !
आर्यभट्ट विश्व को “शुन्य” इनाम की है,
हिन्दुस्तान भरत नाम की है,
सच में भारत भूमि पर गांधी, मोदी,योगी काम की है !

ये हिन्दी ये हिन्दुस्तान बलिया के साहित्यकार
डॉ हजारी प्रसाद की है,
आपस में क्यों हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई फसाद की है,
ये भूमि अकबर, नेहरू और राजेंद्र प्रसाद की है,
स्वतंत्र तो हूं पर अंग्रेज स्वतंत्रता लड़ने के बाद की है !
गर्व है चंन्द्रशेखर नेताजी सुभाष चंद्र पर जिन्होंने हमें आजाद की है !
ये भूमि तो कवि जयशंकर प्रसाद की है !
और ये प्यारा हिन्दुस्तान प्रतिभा पाटिल ,पीयूष गोयल और
लालू प्रसाद की है !

पुथ्वीराज,व महाकवि विद्यापति और नागार्जुन की है,
स्वतंत्र हिन्दुस्तान भगत और शहीदों की खून की है,
आज भी विश्व में प्रशंसा विवेकानन्द जी की गुण की है,
ये हिन्दुस्तान राहुल, नीतीश, ममता और
रक्षा मंत्री अरुण की है
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई की ही नहीं बल्कि ये हिन्दुस्तान
सम्पूर्ण की है !

कृपा माँ सरस्वती पिता शिव और महेश की है,
कलकत्ता के बि बि डि (B.B.D) बाग महान क्रांतिकारी
विनय बादल और दिनेश की है,
ये धरती महान नाटककार मोहन राकेश की है,
स्वर्ग से भी सुंदर हाल कश्मीर की परिवेश की है,
वह है देश हिन्दुस्तान जो एशिया महादेश की है !

जो विश्व को आनंद की है,
राधा कृष्ण माता यशोदा और नंद की है,
मिथिलांचल के आदर्श राजन जनक और कहानी के
बाप प्रेमचंद की है,
ये हिन्दुस्तान सुजान के वियोगी कवि घनानंद की है ।

बिरसा मुंडा और गुरु गोविंद की है,
दार्शनिक और महान महर्षी अरविंद की है !
गंगा यमुना और गति सिंध की है,
ये हिन्दुस्तान हर एक जनता के प्रिय राष्ट्रपति कोविंद की है !

महाराष्ट्र के कवि तुकाराम व साधु संत की है ,
ओम (ऊं) (786) सात सौ छियासी जैसी मंत्र की है !
कबीर, तुलसी सूर की कंठ की है,
ये भूमि महादेवी वर्मा ,मैथिलीशरण गुप्त और पंत की है !

भारत हम पंजाबी बंगाली और बिहारी की है,
सपना टैगोर, राष्ट्र गुरु सुरेन्द्रनाथ,और राष्ट्र कवि
रामधारी की है,
ईद दिवाली ये पूजन भूमि माँ दुर्गा और काली की है,
तब ही तो ये हिन्दुस्तान हर नर और नारी की है !

ये भूमि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की है,
पृथ्वीराज चौहान का दरवारी कवि चंदबरदाई की है !
पूजन यहां गाय की है,
नौकरी और व्यवसाय की है ,
ये धर्म भूमि साईं बाबा और गोसाईं की है !
भारत माँ की सेवा में हाथ
जल,थल, वायु भारतीय सेना तीनों भाई की है ,
सदियों से एक रहे अब न वक्त लड़ाई की है !

कवि हरिवंश राय बच्चन और
कौन बनेगा करोड़पति अमिताभ की है,
ये भूमि कुरान बाइबिल गीता रामायण और
महाभारत जैसी काव्य की है !
गौतम बुद्ध और महावीर जैसी उत्तम स्वभाव की है,
ये हिन्दुस्तान शहर और गांव की है !

टीपू सुल्तान की है ,
ये भूमि कवि व कृष्ण भक्त रसखान की है !
अभिनेता संजय दत्त, सनी देओल, शाहरुख और सलमान खान की है !
सानिया मिर्जा भी यही कि वह भी हिन्दुस्तान की है !

ये भूमि शंकराचार्य की है ,
हिन्दी साहित्य के रामचंद्र शुक्ल आचार्य की है !
हिन्दुस्तान गणितज्ञ और ज्योतिषाचार्य की है,
और ” सिध्दांत शिरोमणि की रचना भास्कराचार्य की है !

अब दिन साह अमित की है,
ये भारत के बंग भूमि अभिनेता प्रसनजीत की है !
प्रसिद्धि किशोर कुमार की गीत की है !
मिथिला पेंटिंग मधुबनी चित्रकला की व गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र की है,
तैयारी अब जीत की है,
ये हिन्दुस्तान हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई की ही नहीं
ये हिन्दुस्तान हम सभी मित्र की है !

ताजमहल शाहजहां के प्रेमिका मुगल
साम्राज्य के मुमताज की है,
प्रार्थना और नमाज की है !
अलाउद्दीन खिलजी की आवाज की है,
विदेश मंत्री सुक्षमा स्वराज की है,
गर्व है हमें कि हम हिन्दुस्तान राज्य की है !

सूर्य के प्रकाश चांद की शीतल की है, :
ये भूमि गंगा यमुना सरस्वती की निर्मल जल की है !
वीर कुंवर व दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल की है !
और ये भारत “अकबरनामा” का रचयिता
अबुलफजल की है,
ये हिन्दुस्तान रहा है और लम्बी उम्र की है !

फल फूल माघ और पूस की है,
जन्मभूमि कर्ण लक्ष्मण लव और कुश की है ,
वीरता के प्रतीक विंग कमांडर अभिनंदन की मूंछ की है ,
ये हिन्दुस्तान दानी और कजूंस की है !

मैथिली गायिकी पूनम भोजपुरी हीरो मनोज,निरहुआ
पवन और खेसारी की है,
और अभिनेत्री ऐश्वर्या रानू ,लता मंगेशकर जैसी नारी की है !
ये भारत सचिन, धोनी, विराट और सोरभ आदि क्रिकेट की
खिलाड़ी की है !
और ये हिन्दुस्तान मुख्य नाटककार भिखारी की है !

ग्रैंड ट्रक रोड यानि जी.टी रोड (G.T.Road)
भारत की लम्बी राह की है,
ये बना हुआ शेरशाह की है !
ब्रहमा विष्णु महेश और अल्लाह की है !
ब्राह्मण, क्षत्रिय , वैश्य , शूद्र और मल्लाह की है !
ये हिन्दुस्तान हर एक की चाह की है !

ये भारत द भारत स्काउट एण्ड गाईड,सेंट जाँन ऐम्बूलेंस
,एन.सी.सी(Ncc) ,एन.एस.एस,(Nss) और इग्नू (IGNOU) जैसी संस्था की पावर की है,
इंदिरा गांधी, रामकृष्ण परमहंस ,इब्राहीम लोदी
और बावर की है !
खुदीराम बोस और कुंवर की है ,
बाबा रामदेव की डाबर की है ,
ये हिन्दुस्तान मुकेश अंबानी की जिओ की टावर की है !

हिन्दुस्तान अशोक और चाणक्य के नीती की है,
विद्यासागर,दीन दयाल उपाध्याय भी इसी मिट्टी की है !
खुदी राम बोस और आचार्य जगदीश चंद्र बसु के विज्ञान की रीति की है ,
और ये हिन्दुस्तान रामवृक्ष बेनीपुरी की साहित्य
की वृत्ति की है !

चंद्रगुप्त और भीमराव अम्बेडकर के मति की है,
पदमावती की है ,
भारत अखिलेश और मायावती की है,
ये हिन्दुस्तान सत्यवादी राजा हरिशचंद्र और गौडवाना की शासक दुर्गावती की है !

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सर सैयद अहमद की है,
भारत गद्य और पद्य की है ,
हिन्दुस्तान बी.जे.पी, कांग्रेस,टी.एम.सी,आदि दल और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की है ! (ABVP)
भाईचारा और एकता के कारण कल भी और आज भी विश्व स्तर पर भारत हद की है ,

लाल बहादुर और सरदार वल्लभ भाई पटेल की है,
और भारतीय रेल की है !
भाईचारा की मेल की है,
हिन्दुस्तान कभी भी किसी से भी दोस्ती करने में न
देर की है !

ये भूमि के.एम.करिअप्पा व एस.एच.एफ.मानेकंशा जैसे फील्ड मार्शल की है,
सेना प्रमुख बिपिन रावत व बाल गंगाधर की है !
मनमोहन सिंह भी यही की प्रधानमंत्री आज न कल की है
ये भारत राजा राम मोहन राय जैसे अक्ल की है !
ये हिन्दुस्तान स्वामी दयानंद,व छत्रपति
शिवाजी जैसे शक्ल की है !

भारत बंगाल के वकील,व स्वराज दल के संस्थापक
चितरंजन दास की है,
वाल्मीकि और वेदव्यास की है,
हिन्दुस्तान संस्कृति के कहे जाने वाले शेक्सपीयर
कालीदास की है !
भारतेंदु हरिश्चंद्र युग निर्माता की अभ्यास की है ,
राणा, मीराबाई और ये हिन्दुस्तान वैरागी और संन्यास की है,

दुर्योधन, द्रोणाचार्य और एकलव्य की है,
राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी और पूर्व राष्ट्रपति व भारतरत्न से सम्मानित प्रणब की है !
मानों तो विद्यार्थी, सैनिक, डाक्टर, किसान आदि सबकी है ,
पुरानी और नव की है,
सच में हिन्दुस्तान सबकी साथी पता न ये दोस्ती कब की है !

हवा हूं हवा जो रचना अग्रवाल नाथ केदार की है,
जनता और सरकार की है !
हिन्दुस्तान भारत के हर एक लाल की है,
भूत, वर्तमान ये दोस्ती भविष्य काल की है !

द टाइम्स ऑफ इण्डिया, टेलीग्राफ न्युज पेपर और बंगाली पत्रिका आनंद बाजार की है,
ये भारत साईकिल,बस, घोड़ागाड़ी और कार की है !
प्रभात खबर, दैनिक जागरण, भारत एक नजर, समज्ञा
और सन्मार्ग जैसी अखबार की है ,
ये हिन्दुस्तान आधुनिक भारतीय प्रसिद्ध शायर
इकबाल की है !

राजतरंगिणी की रचयिता कल्हण की है
ये भूमि अहिल्या , और राम-सीता की मिलन की है !
यशोधरा कविता लिखा हुआ कवि मैथिलीशरण की है ,
यह रचना हम हमारी रोशन की है ,
ये धरती राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन की है,
तब ये हिन्दुस्तान हम जन जन की है !

कमला कोसी गंगा की नीर की है,
कन्याकुमारी और कश्मीर की है !
अब फैसला दिमाग और दिल की है,
हिन्दुस्तान भारत के हर एक शरीर की है !
-०-
रोशन कुमार झा
कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

-०-



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