*** हिंदी प्रचार-प्रसार एवं सभी रचनाकर्मियों को समर्पित 'सृजन महोत्सव' चिट्ठे पर आप सभी हिंदी प्रेमियों का हार्दिक-हार्दिक स्वागत !!! संपादक:राजकुमार जैन'राजन'- 9828219919 और मच्छिंद्र भिसे- 9730491952 ***
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Monday, 27 July 2020

धरती (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


धरती
(कविता)

जब पहाडियाँ समतल हो जाती हैं,
बड़े पेड़ गिर पड़ते हैं,
तब भी रखती है शांति
धरती..
तू भी हमारी माँ की तरह ही है।

गड़गड़ाहट बिजली की ,
गर्जन आसमान से
सहते रहती है चुपचाप।
धरती..
तू भी हमारी माँ की तरह ही है  ।।

ज्वालामुखी पहाड़ियां
फूट जाते हैं
झटकते हैं तूफान
देखते रहती है तू
धरती...
तू भी हमारी माँ की तरह ही है।।

धूप से गर्मी हो जाती ,
बारिश गीला करती है
पर तू मौन से रहती है
हे, धरती !
तू भी हमारी माँ की तरह ही है  ।।

मल मूत्र लगाए और थूकना ,
अंधेरे बढ़ाए, रोशनी आए,
सभी एक की तरह ही  है ,

हे, धरती !!
तू भी हमारी माँ की तरह ही है।।

भूकंप कभी कभी , जब गुस्सा आए तो
फिर भी पहले रूप है
धरती....
तू भी हमारी माँ की तरह ही है ।।।
-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-






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Sunday, 5 January 2020

भोजन बनाएंगे (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


भोजन बनाएंगे
(कविता)
हर जगह से खोजते हैं
भोजन के लिए चीजें हम
बढ़ने के बजाय
आयात और खपत
स्वाद और सुविधा लाता है ।

दिन प्रति दिन में
प्रगति के साथ ही दुनिया के
नये आविष्कार होते ही
जब पैसा दुनिया का
राजा बन जाते ही
अपने खाने पीने क्या है
याद भी ना हो जाते ही ।।

इसलिए महसूस हो रही थी
उबलने सुखाने गति धीमी
आशाओं के बढ़ जाने से
इच्छायें बाजार में ज़मा गए ।।

खाने पीने कहाँ से आते हैं
ना जाने, पर खा पी सकते हैं
क्या होगा इस्तेमाल से
कोई बात नहीं इस से ।।


जब उनका उपयोग करें
अगर बहुत स्वादिष्ट है तो
जहर मिलाये मीठा करने
स्मृति नहीं लालची मन में ।।

अपने आँगन में उगने में
अनमोल विचार उठने से
साहस दे रहे ख्वाबों पर
फूलों और फलों से बन
हँसेंगे हम सब पृथ्वी पर ।।।
-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Saturday, 26 October 2019

सृजन महोत्सव (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह


सृजन महोत्सव
(कविता)

हम - हाथ से हाथ पकड़ लिये हैं 
सृजन से सृजन मिलाते हैं 
मन से मन 
और
दिल से दिल, 
पावन पर्व में शामिल कर ।

गंगा जमुना अचिरवती 
नदियों के पानी जैसे 
हम लोगों में खुशियाँ हैं 
स्वर्ग की तरह है ये त्योहार ।। 

कविताओं का कंगन है 
कमानियाँ तो कंचन हैं 
भावनाओं का बंधन है 
सुन्दरता का आंगन है ।।

दीपक जलता है चाँद सा 
दीपावली की मां जैसा 
हर जगह सम्मान हैं ऐसा 
टिप टिप गिरती है वर्षा ।।
-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
18, ग्रीन्फील्ड एटाविल, कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Monday, 13 January 2020

प्रिय कलम (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


प्रिय कलम
(कविता)
कलम, इसलिए तुम
मेरे दिल की यादें 
शांत हो गई और
दबा दिया है तुमने दिल ।

रात बिता के, नींद के बिना
शोक ताप दूर करने में
कभी कभी मन में
विचारों को सजाने में
बहुत थक गए रहते हुए
दायाँ हाथ में मेरे ।।

कलम, इसलिए तुम
मेरे दिल की यादें
शांत हो गई और
दबा दिया है तुमने दिल ।

तुम जो विचार ले कर
किताब पर डाली गई
आँसुओं के मोती
कई मन को खुश के गीत
गाना और बजाना सकेंगे।

कलम इसलिए तुम
मेरे दिल की यादें
शांत हो गई और
दबा दिया है तुमने दिल ।

-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Saturday, 1 February 2020

शायरी (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


शायरी
(कविता)
मैं शायरी हूँ
जिसे शायर ने बनाया है
मैं शायरी हूँ
मुझे गवैया ने साँस दिया है

ओस के द्वारा फूल की पंखुड़ी
सुन्दर होता है
चाँदनी ढलते ही हर आँगन
हसीने की तरह ही हैं
तारे चमकते ही आसमान में
स्वर्ग को याद आता है
सारी सुन्दरता जुड़ कर के
मुझे बनाया है

रिश्ते बना देती हूँ मैं
गाने की तरह भी आती हूँ मैं
विस्मित करती हूँ लोगों को मैं
एक परी की तरह हूँ मैं ।।।

-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Thursday, 21 November 2019

राधा कृष्ण ही हैं हम (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


राधा कृष्ण ही हैं हम
(कविता)
 
वृंदावन ,
चरवाह महल में
हम दोनों ही थे, याद है मुझे,
राधा , राधा, राधा...

राधा, राधा
बुलाने तक तुम
उम्मीद किया है मैंने हरे कृष्ण
कृष्ण,कृष्ण ,कृष्ण ...

पहले टिम टिम चमके आँखें
बुझा दिया है क्या ?
नारंगी रंग होंठों में शब्दों को
छुपा लिया है क्या?

बहुत समय के बाद सोने का सूरज
देखा है मुझे ,
अंदर में हँसी , जो मेरे दिल में छाया
आँखों से देखा है वो

फूल खिले थे
सुगंध देते
इस प्रेम कहानी
कहते हुए

पूजा करूँगी मैं इसे
तेरे मेरे प्रेम की ओर
बार बार जन्मे लेते
तेरे संग ही रहते ।।
-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
18, ग्रीन्फील्ड एटाविल, कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Thursday, 13 February 2020

मोनालिसा (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


मोनालिसा
(कविता)
भोली - भाली मोनालिसा
प्यारी नारी मोनालिसा
गोरी हो तुम मोनालिसा ।

वो ऐसी लड़की नहीं है ,
जिसे किसी ने प्यार ना हो
वह उस बेटी है ,
जिसे डाविंसी ने रूप दिया
उसकी पलकों के साये में जी रही ,
आँखोंने सब को देख लिया ।।

मोती की एक थाली है
जो होंठों के पीछे छिपाई गई
जो मुस्कान है मुंह के कोने ,
वह आप सभी को स्वागत में ।।

सदियों से पहले जैसी,
आज भी वो जीती है वैसी
लोग जहाँ आते, जाते हैं,
उसकी नज़र वहीं चलती है ।।।
-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Friday, 15 November 2019

हे पवन (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


हे पवन
(कविता)
नज़र दे रहे तुझे,
मैं हँसी, हँसी
प्यार से, प्यार से
मैं हँसी, हँसी ...
घर के सामने रहे,
तेरी ओर देखते
प्यार से, प्यार से
मैं हँसी हँसी ...

प्रभात में
तेरा चेहरा
भीग गया था ..
दोपहर में
पागल था ये
मेरी आँखें जला दी ।।

हे , पवन !
ईर्ष्या है क्या ?
क्या यह एक मज़ाक है ?
चेहरे छ: हैं
बारह नेत्र हैं
क्या मेरा रूप है ये ?
-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
18, ग्रीन्फील्ड एटाविल, कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Sunday, 1 December 2019

अयोध्या (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


अयोध्या
(कविता)
जुड़वां फैजाबाद है,
राम का जन्मस्थान है,
रामायण तेरे संग है,
सरयू नदी किनारे ही हो ,
नाम अयोध्या है ,
प्रिय तेरा नाम अयोध्या है ।

हरिदर्शन भजन मंडल ,
मनिपर्वत टेम्पल,
हनुमानघरी मन्दिर,
राजद्वार मन्दिर,
तेरी शान है ,
अयोध्या तेरी शान है ।।

श्री सीताराम मन्दिर,
श्री कलेराम मंदिर,
और नया घट, राजसदन,
होंगे तेरे अभिमान ।।

कनक भवन, तुल्सी उद्यान,
राजघट उद्यान,
हैं तेरे मनमोहन आँगन
आशा और इच्छा है,
बंधन है, हर दिल में ।।।
-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Wednesday, 1 January 2020

नया साल मुबारक हो (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)



नया साल मुबारक हो
(कविता)
हर पल, वक्त, दिन दर्शने वाले
साल दर साल हमें दिखा देते ,
संसार सफर के वर्षों कितने
लोगों के साथ ही गुजर गए ।

दीवार पर लटकते रहे,
घड़ी के साथी भी होते
हर महीने में बदलते हुए,
वर्ष के अंत में धोखा देते।।

हर दिन उत्तम दिन होते,
दिन प्रति दिन, दिन खो जाते
साल के सबकुछ अंत हो जाते ही,
वो दीवार पर ना रहते ।।

एक, दो, तीन कहते, आते
तीस, इकत्तीस गिन, जाते
माह से माह हटा देते
मृत्यु दिसम्बर में होते ।।

और नये साल भी आते
पिछले वर्ष की तरह जाते
अनजाने में नये होते
हम भी बूढ़े हो जातें ।।

तृष्णा, ईर्षया आदि में
क्या है फल इस दुनिया में
दो हजार और बीस में भी,
हम हैं मित्र, दो देशों में ।।।

-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Friday, 28 February 2020

सप्त भार्या (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


सप्त भार्या
(कविता)
दुनिया में बीवियों सात हैं
साथियों के नियति की बात हैं
शादी में हाथ से हाथ लेते ,
वे सदा पतियों के साथ ही हैं ।

वृक्षों और लताएं बन कर
वर्षा के द्वारा इसे पानी दे कर
खुशी से रहने का आसमान सा
मातृ, भगिनी, दासी, सखी,
बीवियाँ हैं चाँद की तरह ।।

पाप में जलती रहती हैं
रेगिस्तान की तरह ही हैं
चोर, वधक, स्वामी हैं नाम
नरक में मालिक होने की
शैतानें सी इन पत्नियों के ।।।
-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Monday, 20 January 2020

आँसू (कविता) - दुल्कान्ती समरसिंह (श्रीलंका)


आँसू
(कविता)
आँखें न देखते हैं ,आँसू
आँखों से गिरते हैं आँसू ।
रातों भर आँखों में रह रह कर,
दो आँखों भीगते हैं आँसू ।

अतीत से आती हैं आँसू,
अतीत को जाती हैं आँसू ।
जब इच्छायें टूट गए तो,
तब गुप्त रूप में हैं आँसू ।।

जन्म से शुरू हुई आँसू ,
देखा या न देखा,हैं आँसू।
जाति भेद न जानते हैं,
अनंत , गर्मी आँसू ।।

स्वप्नों की तरह ही हैं आँसू,
कितनी हैं,नहीं आँसू ।
मुस्कुराहटें के पीछे हैं,
कोई भी ना देखा हैं वो आँसू ।।।

-०-
दुल्कान्ती समरसिंह
कलुतर, श्रीलंका

-०-

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Monday, 16 March 2020

माह फरवरी २०२० की उत्कृष्ट रचनाएँ

सृजन महोत्सव के माह फरवरी २०२० की उत्कृष्ट रचनाएँ 
               आप सभी को बताते हुए हर्ष हो रहा है कि दीपावली के पावन पर्व पर प्रारंभ किए इस पटल पर आज तक दो सौ अस्सी से भी अधिक साहित्यकार एवं उनकी लगभग 800 से भी अधिक रचनाएं प्रकाशित की जा चुकी है. सभी रचनाकारों की विभिन्न विधाओं में प्रेषित और इस पटल पर प्रकाशित रचनाएं मौलिक एवं स्तरीय है, इसमें कोई दोराय नहीं है. आपको बताते हुए हर्ष हो रहा हैं कि मात्र फरवरी २०२० माह में देश-विदेश से लगभग 115 गद्य तथा पद्य विधाओं की रचनाएं प्रकाशित की जा चुकी है. आप सभी सृजन धर्मियों का बहुत ही अच्छा प्रतिसाद, स्नेह और प्रेम मिल रहा हैं. इसके चलते आज तक लगभग 33,400 से भी अधिक  लोगों ने इस पटल को भेट दी है.
              आज इस पटल के माह फरवरी २०२० के सर्वाधिक पसंदीदा गद्य और पद्य विधा की भारतीय रचनाओं के रचना शिल्पियों सहित विदेशी रचना शिल्पियों के योगदान को ध्यान में रखते हुए प्रति माह एक विदेशी रचनाकार को भी सृजन महोत्सव परिवार की और से सम्मानित किया जा रहा है. वह निम्न हैं -
कलुतर (श्रीलंका) से पटल से निरंतर जुडी
दुल्कान्ती समरसिंह जी की कविता 
'शायरी' पर
'विदेशी सृजन शिल्पी'
सम्मान से 
पटल की ओर से सम्मानित करते हुए तथा
 सम्मान पत्र सपुर्द करते हुए हर्ष हो रहा हैं.
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-०-

पद्य विधा में भारत वर्ष के बर्नपुर (पश्चिम बंगाल) की 
अलका 'सोनी' जी की रचना '!! पलभर छोटा है !!' पर
'पद्य सृजन शिल्पी' 
सम्मान से 
पटल की ओर से सम्मानित करते हुए तथा
सम्मान पत्र सपुर्द करते हुए हर्ष हो रहा हैं.
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-०-
गद्य विधा में भारत वर्ष के आदिपुर (गुजरात) के
विवेक मेहता जी की कहानी  
'गुंडे' पर
'गद्य सृजन शिल्पी'
सम्मान से 
पटल की ओर से सम्मानित करते हुए तथा
 सम्मान पत्र सपुर्द करते हुए हर्ष हो रहा हैं. 
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दोनों सृजन शिल्पियों का एवं हमारे साथ जुड़े सभी साहित्य कर्मियों का
हार्दिक आभिनंदन !!!



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सृजन रचानाएँ

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

गद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०

पद्य सृजन शिल्पी - नवंबर २०२०
हार्दिक बधाई !!!

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित

सृजन महोत्सव के संपादक सम्मानित
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ