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Tuesday, 4 August 2020

पगली (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

पगली
(कविता)
मैं पगली हूं
लोग मुझे पगली कहते हैं
पर मुझे पगली बनाया कौन ?
इसी समाज के दरिंदों ने
मेरी जवानी और
मेरे जिस्म के लालच में
दरिंदों ने मेरे साथ
क्या-क्या ना जुल्म किया
मेरा शील हरण किया
मेरे पति को मार डाला
मेरे बच्चों का वध किया
गांव के दबंगों ने
मेरी जमीन हड़प ली
मेरे घर जला दिए
रहने का ठिकाना नहीं
खाने को दाना नहीं
आप ही बताइए
इतना सबकुछ होने के बाद
कोई कैसे  रह सकता है सहज
उसे तो पागल होना ही है
फिर भी मैं सामान्य रही
लेकिन जब मैं
फुटपाथ पर नहाती थी
तो हर आने जाने वालों की
गिद्ध दृष्टि
मेरे मांसल जिस्म पर
अटक जाती थी
मुझे लगता था
सब मिलकर मुझे चारों तरफ से
सैकड़ों चील-गिद्ध  की भांति
मेरे बदन को नोच-नोच
कर खा रहे हैं
पीड़ा जब
असहनीय हो गई
मैंने नहाना छोड़ दिया
बाल सवारना छोड़ दिया
फटे चिथड़े पहनने  लगी
बन गई भूतनी की तरह
बच्चे पत्थर फेंकने लगे
और मैं बन गई पगली
सब कहने लगे पगली आई
पगली आई पगली आई 
-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-



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Wednesday, 26 August 2020

क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है
(कविता)
गीता प्यारी है ,बाइबिल प्यारा है
गुरुग्रंथ साहब  प्यारे हैं
प्यारा पाक कुरान है
क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है

हिंदू प्यारे हैं, मुस्लिम प्यारे हैं
सत श्री अकाल सिख  प्यारे हैं
प्यारे बौद्ध जैन और क्रिश्चियन हैं
क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है

धर्म प्यारा है ,मजहब प्यारा है
पूजा प्यारी है ,अरदास प्यारा है
प्यारा सबका अपना ईमान है
क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है

अल्लाह प्यारे हैं, गॉड प्यारे हैं
वाहेगुरु प्यारे हैं, प्यारे बुद्ध
महावीर और भगवान हैं
क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है

ईद प्यारा है क्रिसमस  प्यारा है
बैसाखी का त्यौहार प्यारा है
प्यारा दीपावली का दीप दान है
क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है

धरती प्यारी अम्बर प्यारा
नदियाँ प्यारी, जंगल प्यारे
प्यारा सारा नील गगन है
क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है

आप भी प्यारे, हम भी प्यारे
प्यारे प्यारे लोग हैं सारे
प्यारा सारा जहान है
क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है

बच्चे प्यारी, बीवी प्यारी
"दीनेश' प्यारे  प्यारे  मां-बाप है
इनकी सेवा करो यही तो भगवान है
क्योंकि प्यारा हिंदुस्तान है.
-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-



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Tuesday, 21 January 2020

काश ऐसा होता (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

काश ऐसा होता
(कविता)
काश ऐसा होता
क्या ही अच्छा होता
हर दिल में प्यार होता
काश ऐसा होता
पंडित मस्जिद में अज़ान देता
मुल्ला मंदिर में घंटी बजाता
हर हिंदू के घर में
ईद के सेवइयां बनती
हर मुस्लिम के घर
होली का गुलाल उड़ता
काश ऐसा होता
क्या ही अच्छा होता
हर दिल में प्यार होता
हर दिल में खुशियां होती
पंडित कुरान की आयतें पढ़ते
मौलवी गीता का ज्ञान सुनाते
हर घर में दिवाली होती
हर घर में शबे बरात होता
क्या ही अच्छा होता
काश ऐसा होता
भूखा नहीं सोता कोई पड़ोसी
चाहे स्वयं भूखे राह जाते
धर्म और मजहब से पहले
इंसान की इंसानियत होती
क्या ही अच्छा होता
हर दिल में प्यार होता
काश ऐसा होता
जब सब हैं एक मालिक के बंदे
तो क्यों करते हैं अजब गजब से धंधे
हर त्यौहार मिलकर मनाते
एक दूसरे को खुशियां बांटते
क्या ही अच्छा होता
काश ऐसा होता
दाढ़ी रखते पंडित
मौलवी करते टीका चंदन
कलमा पढ़ते पंडित
मौलवी करते इसका वंदन
काश ऐसा होता
तो होता नहीं क्रंदन
कितना सुंदर यह मेल होता
भारत के कोने-कोने में खुशहाली होता
दुनिया का सरताज कहलाता
काश ऐसा होता
क्या ही अच्छा होता
"दिनेश" का विचार
जन-जन को भाता
काश ऐसा होता-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


***
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Saturday, 4 January 2020

नव वर्ष (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

नव वर्ष
(कविता)
"नव वर्ष नया साल"
आओ आओ हे नव वर्ष 2020
रहे न कोई किसी से उन्नीस
तेरा स्वागत करते हैं हम
पाकर खुशियां भूलाकर गम
सारे मिल नाचे गाएं ,गाये मुन्ना मुनिया
खुश रहे हैं सभी देश हो चाहे दुनिया
नये साल का है एक ही सपना
खुश हाल रहे सारा देश अपना
प्रेम एकता भाईचारा हो सदा
गम रहे कम खुशियां ज्यादा
बच्चे सब मिलकर नाचे गायें
नाचे गाए सभी खुशियां मनाएं
आता नवबर्ष साल में एक बार
खुशी मनाते मिलकर सभी नर नार
है ये त्यौहार बड़ा ही अजब अनोखा
प्रेम भाव से रहे सभी हो न कोई धोखा
सब मिल कुछ नया करें
दिल से दिल की बात करें
भूल जाएं पुरानी बातें
खट्टी मीठी सब जज्बाते ,
"दीनेश" सब मिलकर कुछ ऐसा करें
एक दूजे से प्यार करें
रहे सब मिलकर ,यही सब दुआ करें
आओ मिलकर नववर्ष का स्वागत करें -०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


***
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Friday, 10 April 2020

देवताओं के कार्य (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

देवताओं के कार्य
(कविता)
देवताओं की शक्ति
शायद क्षीण हो गई है
क्योंकि भक्तों की मनोकामना
पूर्ण करने में वो
अक्षम हो गए हैं
फल मिठाई खा कर
उनका मन भर गया है
लड्डू खाते-खाते शायद
गणेश जी को शुगर हो गया है
या बहुत मोटे हो गए हैं
इसीलिए भक्तों का
बिघ्न नहीं हर रहे हैं
भक्तों के बुलावे पर देवता
अब कहीं नहीं जा रहे हैं
इसीलिए उन्हें
उन जगहों पर
बैठा दिया गया है
जहां पर लोग मना करने के
बावजूद लघुशंका करते हैं
सीढ़ी और लिफ्ट के पास
पान का पिक और
गुटका खा कर फेंकते हैं
इन्हें रोकने के लिए
आप नाराज मत होइए
मैं कोई नास्तिक नहीं
सत्य घटना का
वर्णन कर रहा हूं
एक सच्ची दास्तान
सुना रहा हूं
जिनकी हम पूजा करते हैं
पूजा घर में सजाकर
उन्हें अब गंदगी
रोकने के लिए
गंदे जगहों पर
लगाया जाता है
एक जगह तो वो एक
मस्जिद के दीवारों की
रक्षा करते नजर आते हैं
अपने भक्तों की
लघुशंका से
मैं दुखी होकर
ये कविता लिख रहा हूं
कि क्या देवताओं का
यही काम रह गया है
या मनुष्यों की गलती की
सजा वो भुगत रहे हैं-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


***
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Sunday, 29 December 2019

हम उम्र साथी चाहिए (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

हम उम्र साथी चाहिए
(कविता)
माँ मुझे गुड़िया जैसी
बहना चाहिए
मैं खेल सकूं जिसके साथ
ओ मेरे संग रहना चाहिए
माँ मुझे गुड़िया जैसी बहना चाहिए
माँ जब तुम चली जाती हो काम पर
मैं बोर हो जाता हूं
अकेले बैठे बैठे
ऐसे तो घर में कोई
अपना होना चाहिए
माँ मुझे गुड़िया जैसी बहना चाहिए
दाई माँ के भरोसे तुम
मुझे छोड़कर जाती हो
वह कितनी देर तक मुझे संभालेगी
वह तो बैठे-बैठे सो जाती है
उसे भी तो आराम चाहिए
माँ मुझे गुड़िया जैसी बहना चाहिए
कोई बच्चा बड़ों के संग
कितना देर खेले
उसके लिए तो उसे
उसका हमउम्र साथी चाहिए
माँ मुझे गुड़िया जैसी बहना चाहिए
दफ्तर से लौट कर
तुम भी थक जाती हो
फिर बीना मुझे लोरी सुनाए सो जाती हो
पापा को तो टीवी पेपर
और किताब चाहिए
माँ मुझे गुड़िया जैसी बहना चाहिए
किसके लिए आप दोनों
पैसे जमा कर रहे हो
माँ- बाप के रहते मैं
अनाथ सा हो गया हूं
मानसिक विकास हो मेरा
इसीलिए बच्चों की टोली चाहिए
माँ मुझे गुड़िया जैसी बहना चाहिए-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


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Sunday, 26 January 2020

ए भारत तुझे प्रणाम (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'



ए भारत तुझे प्रणाम
(कविता)
ये भारत तुझे प्रणाम बार-बार प्रणाम
हजार बार प्रणाम अनगिनत बार प्रणाम
बनी रहे शान तेरी चाहे चली जाए जान मेरी
ऐसे विचार जहाँ के लोगों का हो
उस भूमि को मेरा सलाम
ये भारत तुझे बार-बार प्रणाम
माँ से भी प्यारी मातृभूमि होती है
तभी तो माएं अपने लाल
तुझ पर निछावर करती है
वैदिक काल से ही हो तुम महान
इस बात को जानता सकल जहान
यहीं पर जन्मे बुद्ध, नानक, राम और श्याम
हे भारत तुझे बार-बार प्रणाम
यहाँ की संस्कृति है बेमिसाल
अतिथि देवो भवः बना महान
वसुधैव कुटुंबकम का दिया संदेश
यहां की मिट्टी है बड़ी अनोखी
देवता भी करना चाहे यहां विश्राम
हे भारत तुझे बार -बार प्रणाम
कल करती बहती नदियां तेरी
हरियाली से भरे जंगल पर्वत विशाल
पांव पखारे समुद्र जहाँ
ऐसा मनोरम दृश्य और कहाँ
इंडिया हिंदुस्तान तेरा ही नाम
ये भारत तुझे बार-बार प्रणाम
तेरी आन बान शान की खातिर
कितने वीर शहीद हुए कितनी
मांओं की कोख उजड़ी
कितनी दुल्हन विधवा बनी
कितनी बहने रोती रही लेकर भैया का नाम
येभारत तुझे बार-बार प्रणाम
हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़ने वाले तेरे बेटे यहाँ अनेकता में एकता की विशेषता यहां
सभी धर्मों का मेल होता यहां
सुबह को अजान तो शाम को आरती यहाँ
होती रहती है आठों याम
ये भारत तुझे बार-बार प्रणाम
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक
कच्छ से लेकर कोहिमा तक
कितना सुंदर है तस्वीर तेरा
भाव राग ताल का मिश्रण जीवन तेरा
"दीनेश"का तुझे शत बार प्रणाम
बार- बार प्रणाम
ए भारत तुझे बार-बार प्रणाम-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


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Tuesday, 3 December 2019

क्यों और कब (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

क्यों और कब
(कविता)
अपने लिए जो करोड़ों अरबों कमाते हैं
वह पदम श्री पद्म विभूषण भारत रत्न पाते हैं
जो सबके लिए अन्न उगाता है
वह मौत का तोहफा पाता है
उसकी चर्चा दो दिन बाद बंद हो जाती है
जो सीमा पर लड़ अपनी जान गवाते हैं
पर जो देशद्रोह के बारे में नारे रोज लगाते हैं
वो टीवी पर सुर्खियों में छाए रहता है
रखता है जो स्वक्ष समाज को
वो दलित असभ्य कहलाता है
फैलाते हैं जो समाज में वैमनस्य की गंदगी
वो इज्जत दार सभ्य कहलाते हैं
अगर कोई दरिंदा किसी मासूम की
अस्मत से करता है खिलवाड़
मीडिया वालों की फ़्लैश बार-बार चमकते हैं
मगर कोई किसान फसल नष्ट होने से
या भूख से दम तोड़ता है तो
उनका फ्लैश नहीं चमकता है
महीनों हप्तों बाद कोई खबर अति है
कि कोई आत्महत्या किया है
कोई दशरथ मांझी जा छेनी हथौड़े से
पहाड़ काटकर राह है बनाता है
तो उसके छेनी हथौड़ी की आवाज
न मीडिया को सुनाई देती है ना किसी सरकार को लेकिन अगर किसी नेता अभिनेता खिलाड़ी
को जरा सी भी छींक आती है तो
मीडिया वाले तुरंत पहुंच जाते हैं
ये पता लगाने की छींक कैसे आई
सर्दी लगने से या गर्मी लगने से
छोटी सी तू-तू मैं -मैं को
ये दो समुदायों के बीच
मारपीट का नाम देकर
लोगों को बहकाते हैं
पर दो समुदाय मिलकर
कोई अच्छा काम करते हैं
तब उनकी नजर उधर नहीं जाती है
कोहरा छा जाता है
उन्हें तो टीआरपी बढ़ाने वाली
खबर चाहिए
टी. आर.पी . बढ़ाना है
जनता को उल्लू बनाना है
आखिर क्यों और कब तक
ऐसा चलता रहेगा
ऐसा चलता रहेगा

-०-पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


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Wednesday, 4 March 2020

चाहत (लघुकथा) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

चाहत
(लघुकथा)
दो अलग-अलग परिवार एक ही मकान में रहता है। हप्ते पन्द्रह दिनों के अंदर दोनों परिवार में एक-एक नई बहूएं आई । पहले आने वाली बहू सुंदर सुशील एवं पढ़ी लिखी थी, जबकि बाद में आने वाली बहू पहले वाली से काफी कमतर थी। पहले वाली बहू एक घंटे के अंदर घर का सारा काम निपटा कर दिन भर आराम करती थी जबकि दूसरी बहू धीरे-धीरे दिन भर काम करती रहती थी ।
पहले वाली के घर के लोग कहते थे-"तुम सारा दिन बैठे रहती हो कोई काम धंधा नहीं करती हो । नेहा को देखो दिन भर काम करती रहती है। कभी काम से जी नहीं चुराती। खाना बनाने के सिवाय भी बहुत सारा काम होता है ------------।"
उधर दूसरी बहू के घर के लोग कहते थे कितनी सुस्त है ये लड़की एक ही काम में सारा दिन लगी रहती है। तनु को देखो एक-दो घंटे के अंदर घर का सारा काम निपटा कर दिन भर मौज करती है।ये तो एकदम भोंदू है भोंदू ----------------।-" 
एक दिन दोनों बहुएँ आपस में बातें कर रही थी । अजब किस्मत है हमारी । तुम्हें धीरे-धीरे काम करने के लिए डांट पड़ती है और मुझे जल्दी-जल्दी । आखिर इनकी चाहत क्या है ? क्या चाहते हैं ये लोग? हमें इनकी चाहत पूरी करनी होगी।"
और दोनों चाहत पूरी करने के लिए तरकीब सोचने लगी।
-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


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Wednesday, 29 January 2020

स्वागत ऋतुराज बसंत का (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

स्वागत ऋतुराज बसंत का
(कविता)
सरसों के पीले फूलों ने
अलसी के नीले फूलों से कहा
चलो चलें करने स्वागत
ऋतुराज बसंत का
आम के बौरों की सुगंध ने
हवा से कर ली गलबहियाँ
और निकल पड़े करने स्वागत
ऋतुराज बसंत का
गेहूँ की सुनहली बालियों ने
झूम-झूम झूमर गाते
चंवर डोलाते अरहर से कहा
चलो चले करने के स्वागत
ऋतुराज बसंत का
धानी चुनर पीली साड़ी पहन के
ओढ़ के नीली ओढ़नी
गांव की सब सखियां सारी
निकल पड़ी स्वागत करने
ऋतुराज बसंत का
अबीर गुलाल उड़ावत
ढोल शंख मृदंग बाजावत
मनचलों की टोली चली
करने स्वागत
ऋतुराज बसंत का
शब्दों के फूलों से
सुरों के धागों से
कविता की माला बना
"दीनेश" करने चला स्वागत
ऋतुराज बसंत का
स्वागत ऋतुराज बसंत का -०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


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Monday, 16 March 2020

बेचते हैं (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

“बेचते हैं"
(कविता)
दामन में जिनके दाग हैं
वो सफेदी बेचते हैं
दवा बनाने वाले
मर्ज बेचते हैं
शराब बेचकर कोई
दूध खरीदता है
कोई दूध बेचकर
शराब खरीदता है
वो सवाल भेजकर
जवाब खरीदते हैं
चेहरा जिनका गमगीन है
वह खुशी बेचते हैं
अधर्म करने वाले
अब फूल बेचते हैं
प्यार के बदले बच्चे
मां-बाप को शूल बेचते हैं
साधु संत प्रवचन के बदले
अब दुर्बचन बेचते हैं
नेताजी सद्भावना भाईचारा
के बदले दंगा बेचते हैं
करते थे पहले जो चोरी
अब ताले बेचते हैं
दुनिया एक बाजार है यहां
हर कोई कुछ न कुछ बेचता है
खरीदना है आपको अगर
तो अच्छा ही खरीदी है
बेचना है आपको भी
तो अच्छाई बेचिए ,अच्छाई बेचिए
तो ऐसा है सब का जुनून
नहीं है कहीं भी सुकून
तो आइए बकौल गांधी जी
हम उनके आदर्शों को अपनाएं
न बुरा बोले न बुरा देखे ना बुरा सुने-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


***
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Tuesday, 11 February 2020

बुराई में अच्छाई (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'

बुराई में अच्छाई
(कविता)
कौन कहता है
कैकेयी बुरी थी
अपना स्वार्थ सिद्ध करना
क्या बुरी बात है ?
हर कोई तो अपना
स्वार्थ सिद्ध करता है
कैकेई ने किया
तो क्या बुरा किया
हर मां अपने बच्चे का
भला चाहती है
कैकेई ने अपना
स्वार्थ नहीं सिद्ध किया
लोगों को लगता है कि
वो स्वार्थी थी
लेकिन नहीं
वो स्वार्थी नहीं
परमार्थी थीं
अगर राम को
बन में जाने का
आदेश न देती
तो वनवासियों का
कल्याण कैसे होता
तरण केवट का कैसे होता
कैसे होता शबरी का उद्धार
कैसे जटायु
एक नारी के लिए
शहीद होते
कैसे होता
एक औरत पर
बुरी नजर रखने वाले
बाली का वध
कैसे होती मित्रता
राम और सुग्रीव की
कैसे होते इतने प्रसिद्ध
नल और नील
कैसे राम नाम की
महिमा गाई जाती
कैसे एक साधारण भालू
हनुमान को उनकी
शक्ति याद दिला कर
ऋक्षराज जामवंत कहलाते
तब हनुमान
हनुमान न होकर
एक साधारण
वानर ही रहते
कैसे प्रेरणा दायक होता
एक गिलहरी का प्रयास
तब सोचिए विचारिये
इस तरह का प्रयास
आप सब भी कीजिए
बुराई में भी अच्छाई ढूँढ़िये
कैकेई को गाली
मत दीजिए
उसके दूरंदेशी को
पहचानिए
उसे भी श्रेष्ठ मां का
दर्जा दीजिए
बुराई में भी अच्छाई ढूँढ़िये
"दीनेश" बुराई में भी अच्छाई ढूँढ़िये-०-
पता: 
दिनेश चंद्र प्रसाद 'दिनेश'
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
-०-


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Sunday, 26 January 2020

२६ जनवरी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभाकामनाएं

७१ वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बढ़ियाँ एवं शुभकामनाएँ 
सादर प्रणाम
प्रस्तुत हैं 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर सृजन महोत्सव पटल प्रकाशित रचनाएं। सभी रचनाकार और पाठक गणों का हार्दिक अभिनंदन और आभार। अपनी रचनाओं को अधिकाधिक साहित्यिक मित्रों व व्हाट्सएप्प ग्रुप में शेयर करें ताकि आपकी रचना अधिक पाठकों तक पहुंचे।धन्यवाद
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
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★★ एकता की पहचान ★★ (कविता) - अलका 'सोनी'
मेरा भारत महान (कविता) - एस के कपूर 'श्रीहंस'
भाईचारा (कविता) - डॉ . भावना नानजीभाई सावलिया
ए भारत तुझे प्रणाम (कविता) - दिनेश चंद्र प्रसाद 'द...
आओ एकता का डोर बुने (कविता) - संगीता ठाकुर (नेपाल)
भारत देश महान (कविता) - सुमन अग्रवाल "सागरिका"
! ग्रेसी ! (लघुकथा) - डॉ विनीता राहुरीकर
'भारत माँ की जय' (कविता) राजू चांदगुडे
संडे का खून (लघुकथा) - गोविंद भारद्वाज
“हम भारत के लोग” (कृति चर्चा) - संदीप सृजन
ज़रा याद करें (कविता) - राजीव डोगरा
ऐ मेरे मेहबूब वतन (गीत) - अख्तर अली शाह 'अनन्त'
गणतांत्रिक देश हमारा..... (कविता) - रामगोपाल राही...
!! मैं देश बदलने निकला हूँ !! (कविता) - अमन न्याती...
नया अभियान करें (राष्ट्रभक्ति बालगीत) - राजेंद्र श...
आये वतन पे खतरा (कविता) - रूपेश कुमार
हिंदुस्तान हमारा है (कविता) - अलका पाण्डेय
भारत माँ की जय (कविता) - विजयानंद विजय
हे...वीर (कविता) - गोविन्द सिंह चौहान
भारत की शान तिरंगा (कविता) -शुभा/रजनी शुक्ला
नन्ही कोशिश (कघुकथा) - डा. नीना छिब्बर
प्यारा वतन (कविता) - रश्मि लता मिश्रा
लिखूँ न लिखूँ (कविता) - सुशीला जोशी
आँख मेरी भर आती है (कविता) - अंजलि गोयल 'अंजू'
तिरंगा (कविता) - डॉ.नीलम खरे
राष्ट्रभक्ति (लघुकथा) - प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे
तिरंगे का मान बढाये (कविता) - सुनील कुमार माथुर
मेरा भारत महान (कविता) - एस के कपूर 'श्रीहंस'
गणतंत्र उबल रहा है (कविता) - श्रीमती सरिता सुराणा
सुभाषचन्द्र बोस (कविता) - अख्तर अली शाह 'अनन्त'
दास्तान भारत की (ग़ज़ल) - महावीर उत्तराँचली
सिर्फ लाल... (कविता) - रूपेश कुमार
आ गया गणतंत्र दिवस (कविता) - डॉ. प्रमोद सोनवानी
मिट्टी में मिल जानी है (कविता) - सरिता सरस
बलिदानी (कविता) - गोविन्द सिंह चौहान
वतन हमारा (कविता) - प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे

-०-

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Sunday, 10 January 2021

हिन्दुस्तान हम सबका है (कविता) - रोशन कुमार झा

 

हिन्दुस्तान हम सबका है 

(कविता)
सब मामला खुदा मसीहा भगवान की है,
दो हजार उन्नीस से बीस हुए ये नया वर्ष हम इंसान की है !
पूजा पाठ कला और विज्ञान की है,
मंदिर गुरुद्वारे ,चर्च मस्जिद है जहां वह सर्वभूमि
हिन्दुस्तान की है !

अटल और कलाम की है,
रहीम और राम की है !
आर्यभट्ट विश्व को “शुन्य” इनाम की है,
हिन्दुस्तान भरत नाम की है,
सच में भारत भूमि पर गांधी, मोदी,योगी काम की है !

ये हिन्दी ये हिन्दुस्तान बलिया के साहित्यकार
डॉ हजारी प्रसाद की है,
आपस में क्यों हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई फसाद की है,
ये भूमि अकबर, नेहरू और राजेंद्र प्रसाद की है,
स्वतंत्र तो हूं पर अंग्रेज स्वतंत्रता लड़ने के बाद की है !
गर्व है चंन्द्रशेखर नेताजी सुभाष चंद्र पर जिन्होंने हमें आजाद की है !
ये भूमि तो कवि जयशंकर प्रसाद की है !
और ये प्यारा हिन्दुस्तान प्रतिभा पाटिल ,पीयूष गोयल और
लालू प्रसाद की है !

पुथ्वीराज,व महाकवि विद्यापति और नागार्जुन की है,
स्वतंत्र हिन्दुस्तान भगत और शहीदों की खून की है,
आज भी विश्व में प्रशंसा विवेकानन्द जी की गुण की है,
ये हिन्दुस्तान राहुल, नीतीश, ममता और
रक्षा मंत्री अरुण की है
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई की ही नहीं बल्कि ये हिन्दुस्तान
सम्पूर्ण की है !

कृपा माँ सरस्वती पिता शिव और महेश की है,
कलकत्ता के बि बि डि (B.B.D) बाग महान क्रांतिकारी
विनय बादल और दिनेश की है,
ये धरती महान नाटककार मोहन राकेश की है,
स्वर्ग से भी सुंदर हाल कश्मीर की परिवेश की है,
वह है देश हिन्दुस्तान जो एशिया महादेश की है !

जो विश्व को आनंद की है,
राधा कृष्ण माता यशोदा और नंद की है,
मिथिलांचल के आदर्श राजन जनक और कहानी के
बाप प्रेमचंद की है,
ये हिन्दुस्तान सुजान के वियोगी कवि घनानंद की है ।

बिरसा मुंडा और गुरु गोविंद की है,
दार्शनिक और महान महर्षी अरविंद की है !
गंगा यमुना और गति सिंध की है,
ये हिन्दुस्तान हर एक जनता के प्रिय राष्ट्रपति कोविंद की है !

महाराष्ट्र के कवि तुकाराम व साधु संत की है ,
ओम (ऊं) (786) सात सौ छियासी जैसी मंत्र की है !
कबीर, तुलसी सूर की कंठ की है,
ये भूमि महादेवी वर्मा ,मैथिलीशरण गुप्त और पंत की है !

भारत हम पंजाबी बंगाली और बिहारी की है,
सपना टैगोर, राष्ट्र गुरु सुरेन्द्रनाथ,और राष्ट्र कवि
रामधारी की है,
ईद दिवाली ये पूजन भूमि माँ दुर्गा और काली की है,
तब ही तो ये हिन्दुस्तान हर नर और नारी की है !

ये भूमि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की है,
पृथ्वीराज चौहान का दरवारी कवि चंदबरदाई की है !
पूजन यहां गाय की है,
नौकरी और व्यवसाय की है ,
ये धर्म भूमि साईं बाबा और गोसाईं की है !
भारत माँ की सेवा में हाथ
जल,थल, वायु भारतीय सेना तीनों भाई की है ,
सदियों से एक रहे अब न वक्त लड़ाई की है !

कवि हरिवंश राय बच्चन और
कौन बनेगा करोड़पति अमिताभ की है,
ये भूमि कुरान बाइबिल गीता रामायण और
महाभारत जैसी काव्य की है !
गौतम बुद्ध और महावीर जैसी उत्तम स्वभाव की है,
ये हिन्दुस्तान शहर और गांव की है !

टीपू सुल्तान की है ,
ये भूमि कवि व कृष्ण भक्त रसखान की है !
अभिनेता संजय दत्त, सनी देओल, शाहरुख और सलमान खान की है !
सानिया मिर्जा भी यही कि वह भी हिन्दुस्तान की है !

ये भूमि शंकराचार्य की है ,
हिन्दी साहित्य के रामचंद्र शुक्ल आचार्य की है !
हिन्दुस्तान गणितज्ञ और ज्योतिषाचार्य की है,
और ” सिध्दांत शिरोमणि की रचना भास्कराचार्य की है !

अब दिन साह अमित की है,
ये भारत के बंग भूमि अभिनेता प्रसनजीत की है !
प्रसिद्धि किशोर कुमार की गीत की है !
मिथिला पेंटिंग मधुबनी चित्रकला की व गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र की है,
तैयारी अब जीत की है,
ये हिन्दुस्तान हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई की ही नहीं
ये हिन्दुस्तान हम सभी मित्र की है !

ताजमहल शाहजहां के प्रेमिका मुगल
साम्राज्य के मुमताज की है,
प्रार्थना और नमाज की है !
अलाउद्दीन खिलजी की आवाज की है,
विदेश मंत्री सुक्षमा स्वराज की है,
गर्व है हमें कि हम हिन्दुस्तान राज्य की है !

सूर्य के प्रकाश चांद की शीतल की है, :
ये भूमि गंगा यमुना सरस्वती की निर्मल जल की है !
वीर कुंवर व दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल की है !
और ये भारत “अकबरनामा” का रचयिता
अबुलफजल की है,
ये हिन्दुस्तान रहा है और लम्बी उम्र की है !

फल फूल माघ और पूस की है,
जन्मभूमि कर्ण लक्ष्मण लव और कुश की है ,
वीरता के प्रतीक विंग कमांडर अभिनंदन की मूंछ की है ,
ये हिन्दुस्तान दानी और कजूंस की है !

मैथिली गायिकी पूनम भोजपुरी हीरो मनोज,निरहुआ
पवन और खेसारी की है,
और अभिनेत्री ऐश्वर्या रानू ,लता मंगेशकर जैसी नारी की है !
ये भारत सचिन, धोनी, विराट और सोरभ आदि क्रिकेट की
खिलाड़ी की है !
और ये हिन्दुस्तान मुख्य नाटककार भिखारी की है !

ग्रैंड ट्रक रोड यानि जी.टी रोड (G.T.Road)
भारत की लम्बी राह की है,
ये बना हुआ शेरशाह की है !
ब्रहमा विष्णु महेश और अल्लाह की है !
ब्राह्मण, क्षत्रिय , वैश्य , शूद्र और मल्लाह की है !
ये हिन्दुस्तान हर एक की चाह की है !

ये भारत द भारत स्काउट एण्ड गाईड,सेंट जाँन ऐम्बूलेंस
,एन.सी.सी(Ncc) ,एन.एस.एस,(Nss) और इग्नू (IGNOU) जैसी संस्था की पावर की है,
इंदिरा गांधी, रामकृष्ण परमहंस ,इब्राहीम लोदी
और बावर की है !
खुदीराम बोस और कुंवर की है ,
बाबा रामदेव की डाबर की है ,
ये हिन्दुस्तान मुकेश अंबानी की जिओ की टावर की है !

हिन्दुस्तान अशोक और चाणक्य के नीती की है,
विद्यासागर,दीन दयाल उपाध्याय भी इसी मिट्टी की है !
खुदी राम बोस और आचार्य जगदीश चंद्र बसु के विज्ञान की रीति की है ,
और ये हिन्दुस्तान रामवृक्ष बेनीपुरी की साहित्य
की वृत्ति की है !

चंद्रगुप्त और भीमराव अम्बेडकर के मति की है,
पदमावती की है ,
भारत अखिलेश और मायावती की है,
ये हिन्दुस्तान सत्यवादी राजा हरिशचंद्र और गौडवाना की शासक दुर्गावती की है !

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सर सैयद अहमद की है,
भारत गद्य और पद्य की है ,
हिन्दुस्तान बी.जे.पी, कांग्रेस,टी.एम.सी,आदि दल और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की है ! (ABVP)
भाईचारा और एकता के कारण कल भी और आज भी विश्व स्तर पर भारत हद की है ,

लाल बहादुर और सरदार वल्लभ भाई पटेल की है,
और भारतीय रेल की है !
भाईचारा की मेल की है,
हिन्दुस्तान कभी भी किसी से भी दोस्ती करने में न
देर की है !

ये भूमि के.एम.करिअप्पा व एस.एच.एफ.मानेकंशा जैसे फील्ड मार्शल की है,
सेना प्रमुख बिपिन रावत व बाल गंगाधर की है !
मनमोहन सिंह भी यही की प्रधानमंत्री आज न कल की है
ये भारत राजा राम मोहन राय जैसे अक्ल की है !
ये हिन्दुस्तान स्वामी दयानंद,व छत्रपति
शिवाजी जैसे शक्ल की है !

भारत बंगाल के वकील,व स्वराज दल के संस्थापक
चितरंजन दास की है,
वाल्मीकि और वेदव्यास की है,
हिन्दुस्तान संस्कृति के कहे जाने वाले शेक्सपीयर
कालीदास की है !
भारतेंदु हरिश्चंद्र युग निर्माता की अभ्यास की है ,
राणा, मीराबाई और ये हिन्दुस्तान वैरागी और संन्यास की है,

दुर्योधन, द्रोणाचार्य और एकलव्य की है,
राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी और पूर्व राष्ट्रपति व भारतरत्न से सम्मानित प्रणब की है !
मानों तो विद्यार्थी, सैनिक, डाक्टर, किसान आदि सबकी है ,
पुरानी और नव की है,
सच में हिन्दुस्तान सबकी साथी पता न ये दोस्ती कब की है !

हवा हूं हवा जो रचना अग्रवाल नाथ केदार की है,
जनता और सरकार की है !
हिन्दुस्तान भारत के हर एक लाल की है,
भूत, वर्तमान ये दोस्ती भविष्य काल की है !

द टाइम्स ऑफ इण्डिया, टेलीग्राफ न्युज पेपर और बंगाली पत्रिका आनंद बाजार की है,
ये भारत साईकिल,बस, घोड़ागाड़ी और कार की है !
प्रभात खबर, दैनिक जागरण, भारत एक नजर, समज्ञा
और सन्मार्ग जैसी अखबार की है ,
ये हिन्दुस्तान आधुनिक भारतीय प्रसिद्ध शायर
इकबाल की है !

राजतरंगिणी की रचयिता कल्हण की है
ये भूमि अहिल्या , और राम-सीता की मिलन की है !
यशोधरा कविता लिखा हुआ कवि मैथिलीशरण की है ,
यह रचना हम हमारी रोशन की है ,
ये धरती राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन की है,
तब ये हिन्दुस्तान हम जन जन की है !

कमला कोसी गंगा की नीर की है,
कन्याकुमारी और कश्मीर की है !
अब फैसला दिमाग और दिल की है,
हिन्दुस्तान भारत के हर एक शरीर की है !
-०-
रोशन कुमार झा
कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

-०-



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